मुन्ना भैया की पत्नी का खूबसूरती में नहीं कोई तोड़, करती हैं ‘मिर्जापुर’ की माधुरी को फेल

मुन्ना भैया की पत्नी का खूबसूरती में नहीं कोई तोड़, करती हैं ‘मिर्जापुर’ की माधुरी को फेल

बॉलीवुड अभिनेता दिव्येंदु शर्मा ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत साल 2011 में फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ से की थी। इस फिल्म में उन्होंने अपने किरदार से दर्शकों का दिल जीत लिया और अपनी एक अलग पहचान बनाई। हालांकि यह सफर आसान नहीं था। उन्हें इंडस्ट्री में अपने पैर जमाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा, लेकिन उनकी मेहनत, लगन और अभिनय प्रतिभा ने उन्हें सफलता दिलाई। दिव्येंदु को असली लोकप्रियता मिली वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ से, जिसमें उन्होंने मुन्ना त्रिपाठी का दमदार किरदार निभाया।

दिव्येंदु शर्मा के प्रोफेशनल करियर के बारे में तो लोग काफी कुछ जानते हैं, लेकिन उनकी निजी जिंदगी और प्यार की कहानी बहुत कम लोगों को पता है। खासकर उनकी पत्नी के बारे में जानने की जिज्ञासा कई लोगों में रहती है। तो चलिए आज हम आपको दिव्येंदु की पत्नी आकांक्षा शर्मा के बारे में बताते हैं और उनके खूबसूरत रिश्ते की कहानी साझा करते हैं। वैसे देखने में भी दिव्येंदु की पत्नी किसी फिल्मी हसीना से कम नहीं हैं।

दिव्येंदु शर्मा लेडी लक आकांक्षा शर्मा पेशे से एक ज्वेलरी डिजाइनर हैं। वह फिल्म इंडस्ट्री से दूर रहना पसंद करती हैं और लाइमलाइट से दूर एक साधारण जीवन जीती हैं। उनका झुकाव हमेशा रचनात्मक क्षेत्रों की ओर रहा है, लेकिन उन्होंने कभी भी फिल्मी दुनिया में आने का मन नहीं बनाया। यही कारण है कि वह अपनी पहचान निजी दायरे तक ही सीमित रखना पसंद करती हैं।

दिव्येंदु और आकांक्षा की दोस्ती कॉलेज से शुरू हुई थी। दिव्येंदु और आकांक्षा की पहली मुलाकात दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में हुई थी। उस समय दिव्येंदु पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई कर रहे थे और आकांक्षा भी उसी कॉलेज में पढ़ाई कर रही थीं। कॉलेज के दिनों में ही दोनों के बीच एक गहरी दोस्ती शुरू हुई। वे अक्सर साथ समय बिताते थे और धीरे-धीरे एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए।

दिव्येंदु ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह आकांक्षा को कॉलेज के समय से ही बेहद पसंद करते थे, लेकिन कभी भी अपने जज्बात जाहिर नहीं कर पाए। उन्होंने कहा, ‘आकांक्षा मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी। मैं उसकी बहुत परवाह करता था, लेकिन कभी भी हिम्मत नहीं जुटा पाया कि उसे बता सकूं कि मैं उससे प्यार करता हूं।’ दिव्येंदु को डर था कि अगर उन्होंने अपने दिल की बात कह दी तो कहीं उनकी दोस्ती टूट न जाए।

इस डर के चलते उन्होंने लगभग 6-7 साल तक अपनी भावनाओं को छुपाए रखा। वह इस उलझन में थे कि कहीं उनका प्यार एकतरफा न हो या आकांक्षा उनकी भावनाओं को गलत तरीके से न ले ले, लेकिन यह सब सिर्फ एक सच्चे और गहरे प्यार का प्रतीक था, जो वक्त के साथ और भी मजबूत होता गया। जब दिव्येंदु अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने मुंबई चले गए, तब उन्होंने महसूस किया कि आकांक्षा उनके जीवन में कितनी महत्वपूर्ण हैं।

दूर रहने पर उन्हें अपने जज्बातों का एहसास हुआ और यह भी समझ आया कि वे आकांक्षा के बिना नहीं रह सकते। यह दूरी उनके दिलों को और करीब ले आई। साल 2011 में जब दिव्येंदु की पहली फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ रिलीज हुई, उसी समय उन्होंने आकांक्षा के सामने अपने प्यार का इजहार किया। आकांक्षा ने भी उनका प्यार स्वीकार किया और दोनों ने एक-दूसरे को जीवनसाथी बनाने का फैसला लिया। इसके एक साल बाद, 2012 में दोनों ने शादी कर ली। दिव्येंदु का मानना है कि आज भी उनके और आकांक्षा के रिश्ते की सबसे मजबूत कड़ी उनकी दोस्ती है।







