पक्षियों से ट्रिपिंग रोकने में MP ट्रांसको को मिली सफलता – विंध्य की 132 और 220 केवी लाइनों पर लगाए बर्ड गार्ड और एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर, ट्रिपिंग की घटनाएं लगभग शून्य

पक्षियों से ट्रिपिंग रोकने में MP ट्रांसको को मिली सफलता
– विंध्य की 132 और 220 केवी लाइनों पर लगाए बर्ड गार्ड और एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर, ट्रिपिंग की घटनाएं लगभग शून्य
भोपाल, यश भारत । जंगलों, जलाशयों और नदियों के आसपास से गुजरने वाली बिजली की ट्रांसमिशन लाइनों में पक्षियों के कारण होने वाली ट्रिपिंग को रोकने के लिए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने तकनीकी उपायों को प्रभावी बनाया है। रीवा, सतना, पन्ना, सीधी और सिंगरौली के पक्षी संवेदनशील क्षेत्रों में 132 केवी और 220 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के टावरों पर बर्ड गार्ड और बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं।
एमपी ट्रांसको के अनुसार वर्ष 2025-26 में रीवा क्षेत्र की ट्रांसमिशन लाइनों में पक्षियों के कारण करीब 20 ट्रिपिंग दर्ज हुई थीं। तकनीकी अध्ययन के बाद संवेदनशील टावरों पर विशेष उपकरण लगाए गए। इसके बाद पक्षीजनित ट्रिपिंग की घटनाएं लगभग शून्य तक पहुंच गई हैं।
टावर पर बैठने से रोकता है बर्ड गार्ड
ट्रांसमिशन टावर अक्सर पक्षियों के बैठने और घोंसला बनाने की जगह बन जाते हैं। पक्षियों के मलमूत्र से इंसुलेटर पर गंदगी जमा होने के कारण नमी के दौरान विद्युत फ्लैशओवर की स्थिति बन सकती है। बर्ड गार्ड टावर के क्रॉसआर्म पर लगाया जाता है, जिससे पक्षियों के बैठने और घोंसला बनाने की संभावना कम होती है।
इंसुलेटर को सुरक्षित रखता है प्रिवेंटर
बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर को डिस्क इंसुलेटर के ऊपरी हिस्से में लगाया जाता है। इससे पक्षियों का मल सीधे इंसुलेटर पर जमा नहीं हो पाता और लाइन ट्रिपिंग का खतरा घटता है।
स्थानीय जरूरत के अनुसार किया तकनीकी बदलाव
रीवा में ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस से जुड़े सहायक अभियंता अजय चौरसिया ने क्षेत्र में पक्षियों के व्यवहार और स्थानीय परिस्थितियों का अध्ययन कर इन उपकरणों में आवश्यक तकनीकी बदलाव किए। फील्ड में किए गए इन बदलावों के बाद ट्रिपिंग की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
2000 से अधिक टावरों पर लगाए जाएंगे उपकरण
एमपी ट्रांसको के अनुसार 220 केवी की पांच ट्रांसमिशन लाइनों के 470 टावरों पर 210 बर्ड गार्ड और 50 प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं। वहीं 132 केवी की 15 लाइनों के 1530 टावरों पर 1600 बर्ड गार्ड और 150 प्रिवेंटर लगाए जाएंगे।
इन उपायों से बिजली आपूर्ति में व्यवधान कम करने के साथ पक्षियों को विद्युत लाइनों से होने वाले नुकसान से बचाने का भी प्रयास किया जा रहा है। खासतौर पर बाणसागर और रिहंद जलाशय, सोन-टमस नदी क्षेत्र तथा संजय-दुबरी टाइगर रिजर्व के आसपास के पक्षी संवेदनशील इलाकों में यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो रही है।







