बाजार में मचा कोहराम,गिरते रिटर्न से घबराए निवेशक, 76% SIP बंद — क्या आप भी कर रहे हैं ये बड़ी गलती?
स्मॉल-कैप और फ्लेक्सी-कैप फंड्स को सबसे ज्यादा नुकसान

Repoter,{Akash pandy} जबलपुर ,यश भारत I शेयर बाजार में चल रही उथल-पुथल और पिछले एक-दो सालों में म्यूचुअल फंड से मिले नेगेटिव रिटर्न ने निवेशकों की रातों की नींद उड़ा दी है. हाल के आंकड़ों के मुताबिक, इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम में हुए नुकसान को देखते हुए निवेशक अब बड़े पैमाने पर अपने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) बंद कर रहे हैं. फरवरी के आंकड़ों के अनुसार, SIP बंद करने का अनुपात बढ़कर 76% हो गया है. यह आंकड़ा साफ तौर पर बाजार में बढ़ रही घबराहट को दिखाता है.

स्मॉल-कैप और फ्लेक्सी-कैप फंड्स को सबसे ज्यादा नुकसान
Geojit Research के आंकड़ों के अनुसार, स्मॉल-कैप और फ्लेक्सी-कैप कैटेगरी में सबसे तेज गिरावट देखी गई है. पिछले एक साल में, स्मॉल-कैप फंड्स ने औसतन 15% का नुकसान दिया है, जबकि फ्लेक्सी-कैप फंड्स में 14% तक का नुकसान हुआ है.
इसके अलावा, दो साल की अवधि में भी इन कैटेगरी में 5% से 7% की गिरावट दर्ज की गई है. यह ध्यान देने वाली बात है कि मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव और वैश्विक मंदी के मंडराते खतरे ने न तो लार्ज-कैप फंड्स को बख्शा है और न ही मल्टी-कैप फंड्स को; पिछले एक साल में इन दोनों में ही लगभग 13% से 14% की गिरावट देखी गई है.
नए निवेशक सबसे ज्यादा चिंतित
जानकारों का कहना है कि जिन निवेशकों ने 2020 की तेजी के बाद बाजार में कदम रखा था, वे ही सबसे ज्यादा चिंतित महसूस कर रहे हैं. FinEdge के CEO हर्ष गहलोत के अनुसार, बाजार इस समय दोहरी मार झेल रहा है.
एक तरफ, अनुभवी निवेशक रिटर्न की कमी के कारण अपने SIP रोक रहे हैं. दूसरी तरफ, नए रजिस्ट्रेशन में भारी गिरावट आई है. Smallcase के फंड मैनेजर शशांक उडुपा का मानना है कि यह दौर नए निवेशकों के लिए खास तौर पर चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वे पहली बार बाजार में ऐसी गिरावट का सामना कर रहे हैं.
SIP रोकने वालों के लिए एक चेतावनी
बाजार के जाने-माने जानकारों का कहना है कि SIP बंद करना कोई समझदारी भरा फैसला नहीं है, क्योंकि इससे नियमित और अनुशासित निवेश से मिलने वाले फायदे खत्म हो जाते हैं.
Anand Rathi Wealth की श्वेता रजानी और Enrich Money के CEO पोनमुडी आर. ने इस बात पर जोर दिया कि बाजार में गिरावट का समय ही वह सही समय होता है, जब निवेशक कम कीमतों पर ज़्यादा संख्या में यूनिट्स खरीद सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, जो निवेशक इस गिरावट के दौर में भी बाजार में बने रहेंगे, उन्हें भविष्य में बेहतरीन कम्पाउंडिंग का लाभ मिलेगा. बाजार से बाहर निकलना फ़ायदे के बजाय एक बड़ा नुकसान साबित हो सकता है.






