फोन एवं मोबाइल टैपिंग कर ऑडियो-वीडियो वायरल करना गंभीर अपराध

फोन एवं मोबाइल टैपिंग कर ऑडियो-वीडियो वायरल करना गंभीर अपराध
– अधिनियम का उल्लंघन करने वालों को होगी जेल व जुर्माना
भोपाल यशभारत। डिजिटल युग में लोगों की गोपनीयता और एकांतता की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गोपनीय बातचीत और निजी डेटा की सुरक्षा को लेकर अब कानून और सख्त हो गया है। किसी भी व्यक्ति की फोन एवं मोबाइल की कॉल रिकॉर्डिंग या बातचीत को बिना अनुमति सार्वजनिक करना अब गंभीर अपराध की श्रेणी में आ गया है। अधिनियम के अनुसार गोपनीय बातचीत का ऑडियो वीडियो किसी भी व्यक्ति द्वारा अन्य की सहमति के वायरल किया जाता है या दूसरे को पहुंचाया जाता है तो उसे गंभीर अपराध माना जाएगा। अधिनियम का उल्लंघन करने वाले को दो वर्ष तक की जेल हो सकती है या एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में दोनों दंड एक साथ दिए जाएंगे।
जबलपुर हाईकोर्ट के अधिवक्ता विशाल बघेल ने बताया कि डिजिटल डेटा की सुरक्षा अब पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 व धारा 72 के अनुसार नियमों का पालन करना लोगों के लिए अनिवार्य है। इसके उल्लंघन से न केवल व्यक्तिगत जीवन प्रभावित होता है, बल्कि डेटा सुरक्षा पर भी खतरा हो सकता है।
अधिवक्ता बघेल के मुताबिक लोग अक्सर अपनी गोपनीय जानकारी की सुरक्षा के प्रति लापरवाह हो जाते हैं। ऐसे में यह कानून लोगों को सतर्क रहने और डेटा को सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित करता है। फोन टैपिंग कर ऑडियो वीडियो वायरल करना कानून का उल्लंघन माना जाएगा।






