
जबलपुर यशभारत। पश्चिम मध्य रेल का जबलपुर रेल मंडल लंबे समय से टिकट निरीक्षकों की कमी से जूझ रहा है। जिससे हालात हैं कि यदि जबलपुर से खुलने वाली ट्रेनों को छोड़कर अन्य ट्रेनों की बात करें तो एक ही टिकट निरीक्षक अपनी सर्विस दे रहा है। जबकि विभागीय सूत्रों की माने तो एक ट्रेन में चार टिकट निरीक्षक चलना चाहिए किंतु कमी के कारण रेलवे के खजाने पर भी इसका असर पड़ रहा है। इस संबंध में रेलवे सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जबलपुर रेल मंडल में 702 टिकट निरीक्षकों की जगह वर्तमान में लगभग 584 टिकट चेंकिंग कर्मी ही कार्यरत हैं। वहीं जानकारों की माने तो रेलवे के मानकों के अनुसार जबलपुर मंडल में टिकट चेकिंग में 2500 कर्मचारी होने चाहिए। एक ओर ट्रेनों की संख्या तो लगातार बढ़ रही है वहीं जिस तरह से टीटीई स्टाफ की सेवानिवृत्ति हो रही है लेकिन उस हिसाब से भर्ती नई भर्ती का कम होना इसकी मुख्य वजह सामने आई है।
बता दें कि इस कमी के कारण ट्रेनों में टिकट चेक के दौरान अनेक बार यात्रियों एवं टिकट निरीक्षकों के बीच विवाद की स्थिति भी निर्मित हो जाती है। कई ट्रेनों में तो ऐसे हालात है कि टिकट निरीक्षकों की कमी से जबलपुर से गुजरने वाली ट्रेनों में एक ही टिकट निरीक्षक के जिम्मे पूरी गाड़ी होती है।
नए कर्मचारियों की हो रही कम भर्ती
जानकारों ने बताया कि वर्तमान और आने वाले वर्षों में कर्मचारियों की अधिक से अधिक सेवानिवृत्ति हो रही है लेकिन नए कर्मचारियों की कम भर्ती होने के कारण टिकट निरीक्षकों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। टिकट चेकिंग में कर्मचारियों की संख्या काफी कम है। जिससे टिकट चेकिंग और यात्रा सुविधा पर असर हो सकता है।
यात्री शिकायत में हो रही बढ़ोतरी
टिकट चेकिंग स्टाफ कम होने के कारण प्रॉपर ट्रेन की मैनिंग नहीं हो पाती है जिससे कहीं ना कहीं यात्री शिकायत में में भी बढ़ोत्तरी होती है। इसके साथ ही अनाधिकृत व्यक्तियों एवं बिना टिकट यात्रियों का प्रवेश स्टेशन परिसर में पूर्ण रूप से लगाम नहीं लग पाती है।
फ्री में यात्रा करने वाले मजे में
जबलपुर रेल मंडल में टिकट निरीक्षकों की कमी के कारण ट्रेनों में फ्री की यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या भी दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इसका पता उस समय लगता है जब टिकट चेकिंग स्टाफ द्वारा ट्रेनों में सघन चेकिंग अभियान चलाया जाता है। तब फोकट में यात्रा करने वाले लोगों के आंकड़े निकल कर सामने आते हैं।
24 कोच तक होते हैं गाड़ी में
रेलवे सूत्रों की माने तो इन दिनों ट्रेनों में एसी कोच की संख्या काफी बढ़ चुकी है स्लीपर एवं जनरल कोच कम कर दिए गए हैं इससे आरक्षित कोचों में रेल यात्रियों का काफी दबाव बना रहता है जिससे ट्रेन के यात्रियों की टिकट चेक करना काफी मुसीबत बनी हुई है जानकारों के अनुसार एक ट्रेन में 16 से लेकर 24 कोच होते हैं जिसमें तकरीबन 1000 से अधिक यात्री सफर करते हैं।
टिकट निरीक्षक के उपर होती है बड़ी जिम्मेदारी
उल्लेखनीय है कि रेल में सफर के दौरान आरक्षित एवं अन्य कोचों में टिकट निरीक्षकों के यात्रियों का टिकट चेक करने का जिम्मेदारी का होती है। इसके साथ ही यात्रियों को सफर के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी ना हो इसके लिए वह यात्रियों के लगातार संपर्क में रहता है हालांकि कभी-कभी यात्रियों और टीटीई के बीच सीट को लेकर वाद विवाद की स्थिति भी निर्मित हो जाती है इसके बावजूद भी है अपनी जवाबदारी बखूबी से निभाता है। बावजूद इसके यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने वाला आये दिन कभी पुलिस और कभी यात्रियों का कोप भाजन के कारण मानसिक रूप से परेशान भी रहता है।





