
अनुसंधान व विकास पर खर्च में भारत सातवें स्थान पर. चीन-अमेरिका शीर्ष पर, तीसरे पर जापान
नई दिल्ली, यश भारत वैश्विक स्तर पर रिसर्च एंड डेवलपमेंट (अनुसंधान व विकास) पर होने वाला खर्च किसी भी देश की वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और भविष्य की आर्थिक दिशा को दर्शाता है। वर्ष 2024–25 के ताजा अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार इस क्षेत्र में चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े निवेशक बने हुए हैं, जबकि भारत टॉप-10 देशों की सूची में सातवें स्थान पर है।
कुल अनुसंधान व विकास खर्च के मामले में चीन पहले स्थान पर है। अनुमान है कि चीन ने इस अवधि में लगभग 785 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर राशि अनुसंधान और विकास पर खर्च की। इसके बाद बहुत कम अंतर से संयुक्त राज्य अमेरिका दूसरे स्थान पर है, जिसका अनुसंधान व विकास निवेश लगभग 781 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इन दोनों देशों का संयुक्त निवेश वैश्विक अनुसंधान व विकास खर्च का बड़ा हिस्सा बनाता है, जिससे तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक नवाचार में उनकी बढ़त साफ दिखाई देती है।
तीसरे स्थान पर जापान है, जो ऑटोमोबाइल, रोबोटिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में निरंतर अनुसंधान के लिए जाना जाता है। चौथे नंबर पर जर्मनी और पांचवें स्थान पर दक्षिण कोरिया हैं, जहां उद्योग आधारित शोध और उच्च तकनीक नवाचार को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। छठे स्थान पर यूनाइटेड किंगडम है, जिसने विज्ञान और उच्च शिक्षा से जुड़े शोध में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखी है।
भारत इस वैश्विक सूची में सातवें स्थान पर है। भारत का अनुमानित अनुसंधान व विकास खर्च 75 से 80 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच माना जा रहा है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत एक विकासशील अर्थव्यवस्था होते हुए भी शीर्ष 10 देशों में शामिल है। इसके बाद फ्रांस, कनाडा और इटली क्रमशः आठवें, नौवें और दसवें स्थान पर हैं।
ये आंकड़े संयुक्त रूप से वर्ल्ड इंटलेक्चुअल ऑर्गनाइजेशन (विपो), ओईसीडी और वर्ल्ड बैंक के नवीनतम आंकड़ों प







