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सुप्रीम कोर्ट में कल ओबीसी आरक्षण पर अहम सुनवाई: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 58% आरक्षण लागू न करने का मामला

जबलपुर, देश के सर्वोच्च न्यायालय में कल, 22 जुलाई 2025 को ओबीसी आरक्षण से संबंधित सभी प्रमुख मामलों की सुनवाई निर्धारित की गई है। इस सुनवाई में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकारों द्वारा ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों के लिए बढ़ा हुआ 58% आरक्षण लागू न करने का मामला केंद्र बिंदु में रहेगा। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर अंतरिम आवेदनों और होल्ड किए गए अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच कल सुनवाई करेगी। एक प्रकरण में सरकार ने भी स्टे वेकेटिंग की अंतरिम अर्जी (I.A.) दाखिल की है, जिससे यह सुनवाई और भी महत्वपूर्ण हो गई है।


 

छत्तीसगढ़ में 58% आरक्षण लागू न करने पर अवमानना याचिकाएँ

 

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से सभी संबंधित मामलों को स्थानांतरित कर छत्तीसगढ़ राज्य के मामलों से जोड़ दिया गया है। छत्तीसगढ़ में तत्कालीन कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने आरक्षण की कुल सीमा 50% से बढ़ाकर 58% की थी। बिलासपुर हाई कोर्ट ने इस निर्णय को रद्द कर दिया था, जिसके खिलाफ भूपेश बघेल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर बिलासपुर हाई कोर्ट के आदेश पर स्थगन (स्टे) प्राप्त कर लिया था।सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने अपील के अंतिम निर्णय तक 58% आरक्षण लागू करने का अंतरिम आदेश भी दिया था। हालांकि, सरकार बदलने के बाद मौजूदा भाजपा सरकार 58% आरक्षण लागू नहीं कर रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेशों की अवहेलना करने के आरोप में अवमानना याचिकाएं भी दाखिल की गई हैं।


 

मध्य प्रदेश में 27% आरक्षण पर असमंजस, 13% पद होल्ड

मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार द्वारा बनाए गए कानून पर हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का कोई स्थगन आदेश नहीं है, फिर भी वर्तमान भाजपा सरकार ओबीसी को 27% आरक्षण लागू नहीं कर रही है। विज्ञापनों में 27% आरक्षण की बात लिखी जाती है, लेकिन नियुक्तियां केवल 14% पर ही दी जा रही हैं, जबकि 13% पद होल्ड (स्थगित) किए जा रहे हैं।ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने होल्ड किए गए अभ्यर्थियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं। वहीं, मध्य प्रदेश सरकार विभिन्न अंतरिम आदेशों का हवाला देकर कानून को स्थगित बताने का प्रयास कर रही है। इन अंतरिम आदेशों को रद्द करने के लिए ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन और ओबीसी अभ्यर्थियों की ओर से हस्तक्षेप याचिकाएं और वेकेटिंग आवेदन दाखिल किए गए हैं।उक्त सभी मामलों में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मौखिक उल्लेख (oral mention) के बाद कोर्ट ने दिनांक 22 जुलाई 2025 को कोर्ट नंबर 7 में इन्हें सूचीबद्ध किया है। इस सुनवाई पर लाखों अभ्यर्थियों और दोनों राज्यों के नागरिकों की निगाहें टिकी हैं।

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