जबलपुरमध्य प्रदेशराज्य

गारमेंट एंड फैशन डिजाइनिंग क्लस्टर का बेकार हुआ डाइंग प्लांट

 

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जबलपुर यशभारत। शहर के गारमेंट एंड फैशन डिजाइनिंग क्लस्टर में बने वाशिंग और डाइंग प्लांट के लिए मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी नहीं मिल रही है। इससे इसका संचालन रुक गया है। क्लस्टर एसोसिएशन की तरफ से ढाई माह पहले इसके लिए आवेदन दिया गया था। अभी तक उसका निराकरण नहीं हुआ है। ऐसे में शादी के सीजन में भी शहर के जींस और शर्ट निर्माताओं को यह काम बाहर से करवाना पड़ेगा। इससे उनकी लागत बढ़ गई।
जानकारों के अनुसार यह इतना बड़ा प्लांट है कि एक दिन में 10 हजार पीस की रंगाई व धुलाई हो सकती है। गारमेंट क्लस्टर में इस प्लांट की स्थापना चार करोड़ रुपए की लागत से की गई है। इसे बने चार साल से ज्यादा हो गए हैं। फिर भी यह शुरू नहीं हो सका। इसके लिए मशीनों को आए हुए भी लंबा समय हो गया है। माना जा रहा था कि दिवाली से पहले यह शुरू हो जाएगा। लेकिन प्लांट में लगे बायलर और ईटीपी प्लांट के लिए अब तक एनओसी नहीं मिल पाई है।
शर्ट-पेंट का उत्पादन
जिले में 250 शर्ट निर्माता हैं। एक अनुमान के अनुसार रोजाना 40 से 50 हजार पीस अकेले शर्ट के बनते हैं। इसी प्रकार पेंट, सलवार सूट और दूसरे कपड़े का उत्पादन जबलपुर में होता है। इसके लिए डाइंग और वाशिंग प्लांट की जरुरत होती है।शर्ट की सिलाई के बाद उस पर इंप्रेशन डालने के लिए कई प्रकार की प्रक्रियाएं होती हैं। यह सारा काम प्लांट में होता है। दिवाली के समय जबलपुर में बने कपड़ों की बड़ी मांग थी।

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