
जबलपुर, यश भारत। जिला सहकारी बैंकों में किसानों के नाम पर करोड़ों रुपए के फर्जी लोन बांटे गए हैं, लेकिन एक दशक बीत जाने के बाद भी मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। लगभग 15 ऐसी समितियां हैं, जहां 4 से 5 करोड़ रुपए के फर्जी लोन बांट दिए गए हैं। इसे लेकर कई समितियों में जांच भी हुई है, लेकिन फाइलें समय के साथ धूल की परत के नीचे दब गई हैं। ताजा मामला नरेंद्रपुर और कटंगी समिति का सामने आया है। कटंगी में जांच चल रही है, जिसमें कुछ चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ नरेंद्रपुर समिति का मामला विधानसभा में उठाया गया है।
किसानों को नहीं है जानकारी
जानकारी के मुताबिक, इन फर्जी लोन के मामलों में प्रबंधकों और समिति के अध्यक्षों द्वारा समिति के सदस्य किसानों के नाम पर लोन निकाल लिया गया और फिर उसका उपयोग कर लिया गया, जबकि किसानों को इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। व्यवस्था कुछ इस तरह की थी कि सदस्य किसानों को संस्था द्वारा रियायती दर पर लोन दिया जा सकता था और उसे साल में एक बार रिन्यूअल करवाना होता था। चूंकि संस्था में व्यवस्था मैन्युअल थी, इसलिए हर साल ये लोग लोन की राशि को मैन्युअल रूप से जमा और फिर विड्रॉल दिखा देते थे। ऐसे में किसानों के पास रिकवरी को लेकर कोई जानकारी नहीं पहुंचती थी।
नहीं हो रही एफआईआर
कई समितियों के मामलों में जांच हो चुकी है और जांच के बाद फाइलों को दबा दिया गया है। जबकि भ्रष्टाचार जांच में सामने आ चुका है, उसके बाद भी जिला सहकारी बैंक के अधिकारियों द्वारा संबंधित अध्यक्षों और प्रबंधन के खिलाफ मामले दर्ज नहीं करवाए जा रहे हैं। वहीं, कई जगह बैंक एपेक्स बैंक पर मामला टाल रही है, जबकि बैंक के पास उक्त मामलों में एफआईआर दर्ज करवाने का अधिकार है, जिसके बाद जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। कई प्रबंधक सालों पहले रिटायर हो चुके हैं और कुछ रिटायर होने की दहलीज पर खड़े हैं।
प्रबंधक बने बैठे प्रशासक
नरेंद्रपुर समिति का मामला, जो विधानसभा में उठाया गया है, उसमें कई स्तर पर जांच हो चुकी है। यहां तक कि पुलिस भी अपनी जांच पूरी कर चुकी है, लेकिन उसके बाद भी कार्रवाई का इंतजार है। उक्त समिति में तत्कालीन प्रबंधक वर्तमान में प्राइवेट प्रशासक की भूमिका में बैठे हुए हैं। यानी जिन लोगों ने पहले गोलमाल किया, वे आज भी पद पर बने हुए हैं, लेकिन बैंक कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। जानकारी के मुताबिक, यहां तो आठ में से सात ऋण फर्जी पाए गए हैं, जिनमें लगभग 18 लाख रुपए की राशि का गोलमाल हुआ है। ऐसा क्यों है?







