कोलार में गूंजे शिवपुराण के दिव्य स्वर, कथा सुनने उमड़े श्रद्धालु

कोलार में गूंजे शिवपुराण के दिव्य स्वर, कथा सुनने उमड़े श्रद्धालु
– सृष्टि के आरंभ से नीलकंठ तक की कथा ने किया भावविभोर
यश्भारत भोपाल। कोलार क्षेत्र में आयोजित भव्य शिव कथा के दौरान वातावरण हर हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा। कथा में शिवपुराण के अध्यायों का मनोहर वर्णन किया गया, जिसमें सृष्टि के प्रारंभ, भगवान शिव की महिमा, पार्वती और शिव के मिलन, तथा सृष्टि के सृजन से संहार तक की अद्भुत यात्रा को विस्तार से बताया गया। कथावाचक ने बताया कि सृष्टि की शुरुआत तब हुई जब न आकाश था, न धरती, न जीवन का कोई स्वर। तभी महादेव की तपश्चर्या से सृष्टि की धारा प्रवाहित हुई। इस अनंत सत्य को शब्दों में पिरोया गया शिवपुराण में। यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आस्था का महासागर है जिसमें भगवान शिव के स्वरूप, सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और विनाश का अद्भुत समन्वय मिलता है।

कथा के दौरान बताया गया कि शिवपुराण में 24,000 श्लोक और सात संहिताएं विधेश्वर, रुद्र, शतरुद्र, कोटिरुद्र, उमासंहिता, कैलाससंहिता और वायवीय संहिता सम्मिलित हैं। जब देवताओं और असुरों में युद्ध हुआ, तब भगवान शिव ने स्वयं त्रिपुरासुर का विनाश कर धर्म की रक्षा की। वहीं समुद्र मंथन के समय जब घातक विष निकला, तो महादेव ने उस विष को पीकर लोकों की रक्षा की और तभी उन्हें ‘नीलकंठ’ नाम प्राप्त हुआ।
कथा के अगले प्रसंग में पार्वती और शिव के दिव्य मिलन का भावनात्मक वर्णन हुआ। यह बताया गया कि पार्वती ने कठोर तपस्या और अटूट श्रद्धा से महादेव को प्राप्त किया — यह कथा आज भी नारी के समर्पण, शक्ति और आस्था का प्रतीक मानी जाती है। कार्यक्रम में गीतेश सिंह अध्यक्ष, रामेश्वर धाम दुर्गा उत्सव समिति, विशाल मालवीय उपाध्यक्ष, प्रीति तागड़े सहसचिव, जितेंद्र पाटीदार कोषाध्यक्ष और दीपक करेल उपस्थित रहे। कथा का समापन भजन संध्या के साथ हुआ।







