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फ्लाईओवर के नीचे अव्यवस्थित वाहन पार्किंग बनी खतरे की जड़

न तो डायवर्जन, न घोषित पार्किंग — प्रशासन की खामोशी से बढ़ रहा खतरा!

जबलपुर यश भारत।शहर के प्रमुख फ्लाईओवर के नीचे का इलाका इन दिनों यातायात अव्यवस्था का प्रतीक बन गया है। दिन हो या शाम, इस स्थान पर वाहनों की मनमानी पार्किंग और ट्रैफिक की अव्यवस्थित गति रोज़ाना सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बनती जा रही है। तस्वीरों में साफ़ नज़र आता है कि सड़क किनारे और फ्लाईओवर के नीचे कारें, ऑटो, बाइक, यहाँ तक कि ई-रिक्शा तक बिना किसी नियम के खड़े किए जा रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों और राहगीरों का कहना है कि यह स्थान न तो ट्रैफिक डायवर्जन पॉइंट है और न ही किसी प्रकार का घोषित पार्किंग स्टैंड। ऐसे में यह सवाल उठता है —

“फ्लाईओवर का डायवर्सन है या फिर घोषित पार्किंग स्टैंड?”
अगर नहीं — तो फिर इस अराजकता को कौन अनुमति दे रहा है?”

1️⃣ फ्लाईओवर के नीचे बना अघोषित ‘पार्किंग हब’

फ्लाईओवर के नीचे और किनारों पर दिनभर वाहनों की कतार लगी रहती है। यहां कोई “नो पार्किंग” बोर्ड नहीं है, न ही कोई ट्रैफिक पुलिस कर्मी नज़र आता है। धीरे-धीरे यह जगह अघोषित पार्किंग ज़ोन में तब्दील हो गई है। कई वाहन चालक अपनी गाड़ियाँ खड़ी कर घंटों तक गायब हो जाते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है।

2️⃣ डायवर्जन नहीं, लेकिन ट्रैफिक वहीं से मोड़ा जा रहा

आश्चर्य की बात यह है कि यह क्षेत्र किसी भी प्रकार से “डायवर्जन पॉइंट” घोषित नहीं है, फिर भी ट्रैफिक इसी हिस्से से डायवर्ट होकर गुजरता है। न तो दिशा संकेत हैं और न ही कोई पुलिस व्यवस्था। फलस्वरूप, वाहन एक-दूसरे के सामने अचानक आ जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ गई है।

3️⃣ फ्लाईओवर के नीचे पार्किंग से दृश्यता पर असर

फ्लाईओवर के नीचे खड़े वाहनों के कारण सड़क पर मोड़ के पास दृश्यता बेहद कम हो जाती है। दोपहिया वाहन चालकों को सामने से आती गाड़ियों का अनुमान नहीं लग पाता। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार यहां टक्कर की घटनाएँ घट चुकी हैं लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।

4️⃣ नागरिकों की शिकायतें — “यह तो रोज़ का झंझट बन गया है”

क्षेत्र के दुकानदार और निवासियों का कहना है कि पुलिस और नगर निगम को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन कार्रवाई सिर्फ कागज़ों में ही रह गई।
स्थानीय दुकानदार अमित जैन का कहना है —

“सुबह से रात तक गाड़ियाँ यहां खड़ी रहती हैं। कोई पार्किंग बोर्ड नहीं, कोई डायवर्जन संकेत नहीं, पर प्रशासन चुप है।”

5️⃣ प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

नगर निगम और ट्रैफिक विभाग की लापरवाही इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार मानी जा रही है। न तो यहाँ पर पार्किंग नियमों का पालन कराया जा रहा है, और न ही अवैध पार्किंग करने वालों पर चालान की कार्रवाई हो रही है।

शहर के ट्रैफिक विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लाईओवर के नीचे पार्किंग करना भारतीय सड़क सुरक्षा मानकों (IRC-103) का उल्लंघन है। यह न केवल अवैध है, बल्कि दुर्घटनाओं को न्योता देने के समान है।

6️⃣ नागरिकों की मुख्य माँगें

🔹 फ्लाईओवर के नीचे और मोड़ पर “नो पार्किंग” के बोर्ड लगाए जाएँ।
🔹 ट्रैफिक पुलिस की नियमित गश्त और चालान कार्रवाई शुरू की जाए।
🔹 वैकल्पिक स्मार्ट पार्किंग ज़ोन का निर्धारण कर नागरिकों को दिशा दी जाए।
🔹 फ्लाईओवर के नीचे सीसीटीवी कैमरा लगाए जाएँ ताकि नियम तोड़ने वालों पर नज़र रखी जा सके।
🔹 जाम और दुर्घटना की स्थिति में त्वरित रेस्क्यू के लिए मोबाइल पेट्रोलिंग वैन नियुक्त की जाए।

तस्वीरों में दिखता यथार्थ

📍 फोटो में साफ़ दिख रहा है कि कारें, ऑटो और दोपहिया सड़क के किनारे और बीच तक खड़ी हैं।
📍 मोड़ पर दृश्यता अवरुद्ध है और किसी भी समय टक्कर की संभावना बनी रहती है।
📍 किसी भी दिशा में “डायवर्जन” या “पार्किंग जोन” का संकेत नहीं दिखता।
📍 राहगीर और स्कूटर सवारों को बीच सड़क पर जाम झेलना पड़ रहा है।

यह क्षेत्र न तो ट्रैफिक डायवर्जन पॉइंट है, न ही नगर निगम द्वारा घोषित पार्किंग स्टैंड। इसके बावजूद यहाँ रोज़ाना दर्जनों वाहन खड़े रहते हैं और ट्रैफिक नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यह स्थान किसी बड़ी दुर्घटना का केंद्र बन सकता है।

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