आस्था का कारवां: चिलचिलाती धूप में नंगे पैर अलम थामे बढ़े अकीदतमंद, राहगीरों ने पैरों पर पानी डाल दी राहत

आस्था का कारवां: चिलचिलाती धूप में नंगे पैर अलम थामे बढ़े अकीदतमंद, राहगीरों ने पैरों पर पानी डाल दी राहत
भोपाल, यशभारत। राजधानी में शुक्रवार को मुहर्रम के मौके पर पुराने शहर की सड़कों पर अकीदत और गम का मंजर नजर आया। करबला के शहीदों की याद में सुबह से ही विभिन्न क्षेत्रों से मातमी जुलूसों का सिलसिला शुरू हो गया। भीषण गर्मी और झुलसाने वाली धूप के बीच सैकड़ों अकीदतमंद हाथों में अलम (धार्मिक परचम) थामे नंगे पैर आगे बढ़ते रहे। पूरे रास्ते फिजां में या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं।
इस दौरान सड़कों पर कौमी एकता और इंसानियत की मिसाल भी देखने को मिली। तपती सड़कों पर नंगे पैर चल रहे जायरीन की तकलीफ को देखते हुए रास्ते में खड़े स्थानीय लोगों ने उनके पैरों पर लगातार ठंडा पानी डाला, ताकि उन्हें छाले और जलन से राहत मिल सके।
सामूहिक मातम के बाद वीआईपी रोड रवाना हुए जुलूस
फतेहगढ़, इमामी गेट, हमीदिया रोड और करोंद क्षेत्रों से शुरू हुए ये जुलूस दोपहर में इमामी गेट चौराहे पर एकत्रित हुए। यहाँ अलग-अलग अंजुमनों द्वारा सामूहिक मातम और सीनाज़नी की गई। चौराहों पर उलेमाओं ने करबला के ऐतिहासिक संघर्ष और हजरत इमाम हुसैन की शहादत पर मजहबी तकरीरें पेश कीं। इसके बाद सभी जुलूस वीआईपी रोड स्थित करबला की ओर रवाना हो गए।
इंसानियत की मिसाल: भीड़ के बीच से सुरक्षित निकाली एंबुलेंस
जुलूस के दौरान फतेहगढ़ क्षेत्र में एक एंबुलेंस भीड़ और ट्रैफिक के बीच फंस गई थी। स्थिति को भांपते हुए जुलूस में शामिल अकीदतमंदों और मुस्तैद वालंटियर्स ने संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने तुरंत रास्ता खाली करवाकर एंबुलेंस को सुरक्षित ढंग से आगे के लिए रवाना किया, जिसकी हर तरफ तारीफ हो रही है।
वही यातायात पुलिस ने पुराने शहर के भारत टॉकीज से करबला तक कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया है। शहर में भारी और व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन ने नागरिकों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने और पुलिस के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।







