मुंबई, ईएमएस। अजित पवार की बगावत के बाद से महाराष्ट्र में सियासी बवाल जारी है। अब लड़ाई इस बात पर आकर टिक गई है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी पर किसका अधिकार है? अजित पवार का या शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले का? यहां भी हालात वैसे ही हैं, जैसे शिवसेना के साथ थे। मामला कोर्ट में चला गया है। बागी विधायकों की अयोग्यता को लेकर सुनवाई होगी। इस बीच, बयानबाजी जारी है। मुंबई से लेकर दिल्ली तक सियासी गलियारों में हलचल तेज है। इसका सीधा असर 2024 के आम चुनावों को लेकर की जा रही विपक्षी एकता की कवायद पर भी पड़ेगा। महाराष्ट्र एनसीपी के अध्यक्ष जयंत पाटिल ने अजित पवार समेत मंत्री पद की शपथ लेने वाले सभी नौ विधायकों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित करने की मांग की है। उन्होंने इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को पत्र लिखा है। इस बारे में चुनाव आयोग को भी एक ईमेल भेजा गया है।

रविवार देर रात मीडिया से बात करते हुए पाटिल ने कहा कि हमने विधानसभा अध्यक्ष को अयोग्यता नोटिस दिया है। हम जल्द से जल्द ठोस दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने कहा कि अयोग्यता याचिका नौ नेताओं के खिलाफ दायर की गई है, क्योंकि इन्होंने पार्टी छोडऩे के फैसले के बारे में किसी को नहीं बताया, जो एनसीपी के सिद्धांत के खिलाफ है। पाटिल ने आगे कहा कि हमने चुनाव आयोग को भी पत्र लिखा है।

अजित पवार के घर बुलाई गई मंत्री बने हृष्टक्क विधायकों की बैठक
अब एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली सरकार में शामिल एनसीपी के मंत्रियों की आज अजित पवार के घर पर बैठक होने हो रही है। एनसीपी नेता और पार्टी के विधायक जितेंद्र आव्हाड अपना नियुक्ति पत्र सौंपने महाराष्ट्र स्पीकर के दफ्तर पहुंचे. पार्टी एमएलए अजित पवार द्वारा एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार का पक्ष लेने के बाद रविवार को एनसीपी ने विधानसभा अध्यक्ष के लिए जितेंद्र आव्हाड को मुख्य सचेतक नियुक्त किया।

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Yash Bharat

Editor With मीडिया के क्षेत्र में करीब 5 साल का अनुभव प्राप्त है। Yash Bharat न्यूज पेपर से करियर की शुरुआत की, जहां 1 साल कंटेंट राइटिंग और पेज डिजाइनिंग पर काम किया। यहां बिजनेस, ऑटो, नेशनल और इंटरटेनमेंट की खबरों पर काम कर रहे हैं।

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