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धान खरीदी में कंप्यूटर ऑपरेटरों का गोलमाल कागज किसी के, काम किसी का

कैमरों की निगरानी पर सवाल, जहां हो रही फीडिंग वहां कैमरे क्यों नहीं

धान खरीदी में कंप्यूटर ऑपरेटरों का गोलमाल कागज किसी के, काम किसी का
कैमरों की निगरानी पर सवाल, जहां हो रही फीडिंग वहां कैमरे क्यों नहीं

जबलपुर, यश भारत। जबलपुर जिले के 89 उपार्जन केंद्रों पर धान खरीदी का कार्य जारी है। प्रक्रिया में अब तेजी आई है, लेकिन इसके साथ ही गंभीर अनियमितताएं भी सामने आने लगी हैं। यश भारत द्वारा गुरुवार को किसानों से बोरियों में कटौती का मामला उजागर किए जाने के बाद अब कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति में बड़े गोलमाल की जानकारी मिली है। जिन कंप्यूटर ऑपरेटरों के नाम और दस्तावेज विभाग में जमा हैं, उनकी जगह दूसरे लोग काम कर रहे हैं। नाम किसी और का दर्ज है और कार्य कोई और कर रहा है। यह स्थिति एक-दो नहीं, बल्कि दो दर्जन से अधिक उपार्जन केंद्रों में में पाई जा रही है।
महत्वपूर्ण कड़ी है कंप्यूटर ऑपरेटर
उपार्जन प्रक्रिया में कंप्यूटर ऑपरेटर सबसे अहम कड़ी होता है। किसान द्वारा लाई गई धान की धुलाई के बाद वही ऑनलाइन एंट्री करता है, जिसके आधार पर दस्तावेज तैयार होते हैं
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म.प्र. उपार्जन
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नोडल अधिकारी बने मूक दर्शक, हेराफेरी पर बंद आंखें
और भुगतान होता है। एंट्री में त्रुटि होने पर किसानों का भुगतान अटकता है, जबकि अतिरिक्त या फर्जी एंट्री से बिना धान के ही लाखों रुपये का भुगतान संभव हो जाता है। पूर्व में भी एक्स्ट्रा फीडिंग के मामलों में कंप्यूटर
ऑपरेटरों पर कार्रवाई हो चुकी है। नहीं कर पाएंगे एंट्री
यश भारत को मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार दो दर्जन से अधिक ऐसे ऑपरेटर हैं जिनके दस्तावेज या तो फर्जी हैं या उनकी
योग्यता ही इस कार्य के अनुरूप नहीं है। यदि अधिकारी मौके पर जाकर उनसे फीडिंग करवाएं तो वे एक किसान की एंट्री भी सही तरीके से नहीं कर पाएंगे। यह तथ्य कुछ अधिकारियों को भली-भांति ज्ञात है, इसके बावजूद उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। बाहर के लोगों द्वारा एंट्री कराए जाने से बड़े पैमाने पर हेराफेरी की आशंका है। कार्रवाई की स्थिति में नामजद ऑपरेटर फंसेंगे, जबकि वास्तविक गड़बड़ी करने वाले लोग सामने नहीं आएंगे।

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क्या कर रहे नोडल अधिकारी

पूरे मामले में नोडल अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जिन अधिकारियों को पूरे केंद्र की जिम्मेदारी दी गई है और जिनका केंद्र पर मौजूद रहना अनिवार्य है, उन्हें यह पता होना चाहिए कि कौन व्यक्ति किस कार्य के लिए नियुक्त है। इसके बावजूद यदि उनकी मौजूदगी में बाहरी व्यक्ति कंप्यूटर ऑपरेटर का संवेदनशील कार्य कर रहा है और सभी आईडी-पासवर्ड उसके पास हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है।
कंप्यूटर ऑपरेटरों के दस्तावेज सत्यापन के बाद ही उन्हें कार्य सौंपा गया या है। यदि उनकी जगह कोई और व्यक्ति काम कर रहा है या ऑपरेटर अपनी योग्यता के अनुरूप कार्य नहीं कर पा रहे हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, वहां मौजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
ऋऋषभ जैन, संयुक्त कलेक्टर

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