सीएम हेल्पलाइन की रफ्तार पर ब्रेक: 3 महीने से 1.77 लाख शिकायतें लंबित, सबसे बुरा हाल राजस्व विभाग का

सीएम हेल्पलाइन की रफ्तार पर ब्रेक: 3 महीने से 1.77 लाख शिकायतें लंबित, सबसे बुरा हाल राजस्व विभाग का
भोपाल, यशभारत । प्रदेश के नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और घर बैठे समाधान करने के दावे के साथ शुरू की गई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन खुद कछुआ चाल का शिकार हो गई है। सरकारी विभागों की लापरवाही और लचर कार्यप्रणाली के कारण जनता की सुनवाई पर पूरी तरह ब्रेक लगता नजर आ रहा है। एक हालिया सरकारी समीक्षा में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि प्रदेश में 1 लाख 77 हजार से अधिक शिकायतें ऐसी हैं, जो पिछले तीन महीनों से भी अधिक समय से फाइलों में दबी हुई हैं और उनका निपटारा नहीं हो सका है।
हैरानी की बात यह है कि इस डिजिटल व्यवस्था में 200 से ज्यादा शिकायतें ऐसी भी पाई गईं, जिन्हें संबंधित अधिकारियों ने खोलकर देखना तक गंवारा नहीं किया। यही वजह है कि हेल्पलाइन पर लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है और आम जनता दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है।
राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा बदहाली, 100 दिन से अटके मामले
हेल्पलाइन में दर्ज होने वाली शिकायतों के मामले में सबसे खराब स्थिति राजस्व विभाग की है। समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, अकेले राजस्व विभाग में 1.02 लाख से ज्यादा शिकायतें लंबित पड़ी हैं। इनमें से 30 हजार से अधिक मामले ऐसे हैं जो 100 दिन की समय सीमा को भी पार कर चुके हैं। जमीन का सीमांकन, नामांतरण (म्यूटेशन), खसरा सुधार और दबंगों द्वारा किए गए अवैध कब्जे जैसे बुनियादी मामलों के लिए लोगों को महीनों इंतजार करना पड़ रहा है। अकेले अवैध कब्जे से जुड़ी हजारों शिकायतें अफसरों की टेबल पर धूल खा रही हैं।
गृह विभाग का भी बुरा हाल, एफआईआर और जांच के लिए भटक रही जनता
कानून व्यवस्था और सुरक्षा का दम भरने वाले गृह विभाग में भी स्थिति बेहद चिंताजनक है। विभाग में कुल 54 हजार से अधिक शिकायतें लंबित हैं, जिनमें से करीब 16 हजार मामले 100 दिन से ज्यादा समय से अटके हुए हैं। हेल्पलाइन पर सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं करने, जांच में जानबूझकर देरी करने और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं किए जाने से जुड़ी हैं। समय पर निराकरण न होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे शहरी, एल-3 और एल-4 स्तर पर भी पेंडेंसी
नगरीय विकास एवं आवास विभाग में भी तय समय सीमा के भीतर शिकायतों का समाधान नहीं हो पा रहा है। शहरों में साफ-सफाई, चोक सीवेज, पेयजल संकट, प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ, जर्जर सड़कों की मरम्मत और अवैध कॉलोनियों से जुड़ी समस्याओं को लेकर नागरिक लंबे समय से कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष जनवरी से अब तक सीएम हेल्पलाइन पर 81 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। अधिकारियों की उदासीनता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वरिष्ठ स्तर एल-3 और एल-4 पर भी करीब 1.92 लाख शिकायतें तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी समाधान का इंतजार कर रही हैं।
नीतिगत मामलों का बहाना
इस पूरे मामले पर राजस्व विभाग के आला अधिकारियों का तर्क है कि सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों की नियमित समीक्षा की जाती है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ शिकायतें नीतिगत होती हैं, जिनमें कानूनी और तकनीकी पेंच होने के कारण निराकरण में सामान्य से अधिक समय लगता है। हालांकि, धरातल पर महीनों से परेशान हो रही जनता के लिए यह दलील राहत देने वाली साबित नहीं हो रही है।







