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यौन उत्पीड़न के आरोपों पर कांग्रेस सांसद के खिलाफ भाजपा महिला मोर्चा का प्रदर्शन

नई दिल्ली, एजेंसी। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ छात्राओं के कथित यौन उत्पीड़न का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। सोमवार को दिल्ली में भाजपा महिला मोर्चा ने सांसद के खिलाफ प्रदर्शन कर सख्त कार्रवाई की मांग की। मामले में 11 छात्राओं की ओर से आरोप लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति की जांच के बाद प्रोफेसर को सेवा से हटाने का आदेश जारी किया गया था। वहीं, दिल्ली पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

शिकायत के आधार पर दर्ज हुई एफआईआर

पुलिस के अनुसार, 11 अक्टूबर को जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से शिकायत और संबंधित दस्तावेज प्राप्त हुए थे। इसके आधार पर वसंत कुंज नॉर्थ थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 75(1)(i), 75(1)(ii) और 79 के तहत मामला दर्ज किया गया। प्रकरण की जांच सब-इंस्पेक्टर कविता को सौंपी गई है। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर रही है।

आंतरिक समिति की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई

मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने छात्राओं की शिकायतों की जांच की थी। इस दौरान शिकायतकर्ताओं के बयान, गवाहों की जानकारी और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में अनुचित निजी बातचीत, यौन संकेत करने और बिना सहमति शारीरिक संपर्क जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया। समिति ने कथित व्यवहार को छात्राओं के शैक्षणिक वातावरण और शिक्षक-छात्र संबंधों की पेशेवर मर्यादा के लिहाज से गंभीर माना।

समिति ने सेवा नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बाद विश्वविद्यालय ने 9 अक्टूबर 2026 को प्रोफेसर को सेवा से हटाने का आदेश जारी किया। हालांकि, पुलिस में दर्ज मामले की जांच अभी जारी है। आरोपों की कानूनी पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

सांसद ने आरोपों को बताया प्रतिष्ठा धूमिल करने की कोशिश

अंगोमचा बिमोल अकोइजम ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि आरोप लगाने वाले और इस मामले को लेकर अभियान चलाने वाले उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा महिला मोर्चा ने प्रदर्शन के दौरान मामले में सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।

इस प्रकरण ने विश्वविद्यालयों में छात्राओं की सुरक्षा, शिक्षक-छात्र संबंधों की मर्यादा और यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर संस्थागत कार्रवाई को लेकर बहस तेज कर दी है। फिलहाल, पुलिस की जांच और मामले से जुड़ी आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।

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