बसेड़ी समिति मूंग हेरा फेरी मामला,फर्जी खातों में दिखा दी असली किसानों की उपज
गिनती में कम मिला 1729 क्विंटल मूग और 201 क्विंटल उड़द, वास्तविक गोलमाल 3000 क्विंटल से अधिक का

कट्टा पर्ची के आधार पर किसानों का होगा मिलान गोलमाल का आंकड़ा पहुंच सकता है 3 करोड़ से ऊपर
जबलपुर यश भारत। बसेड़ी समिति के MLT वेयरहाउस में हुए मूंग उड़द की एक्स्ट्रा फीडिंग के मामले में एक ओर जहां जांच ठंडे वेस्ट में चल रही है वहीं दूसरी तरफ नए खुलासे सामने आ रहे हैं। यश भारत को मिली जानकारी के अनुसार गोदाम के अंदर मूंग रखी हुई है उसे में से बहुत बड़ी मात्रा की तो फीडिंग हुई ही नहीं है। जिन किसानों की वह मूंग है उन्हें सिर्फ कट्टा पर्ची दी गई है उन्हें उपार्जन पोर्टल की पर्ची नहीं मिली है । याने की एक्स्ट्रा फीडिंग का मामला 1729 क्विंटल तक सीमित नहीं है यह मात्रा बहुत अधिक है जिसे दूसरे किसानों की मूग दिखाकर कम किया जा रहा है।
पर्चियां से होगा मिलान
जानकारी के मुताबिक अब प्रशासन गिनती पूरी होने के बाद समिति द्वारा जो कट्टा पर्ची के माध्यम से कच्ची पर्ची किसानों को बांटी गई थी उनका मिलान किया जाएगा और सत्यापन होने पर जिन किसानों को ई उपार्जन पोर्टल से पर्ची नहीं दी गई है उन्हें मूंग वापस की जाएगी क्योंकि समिति में ऐसे 60-70 किसान है जिनका कहना है कि उनकी मूग उक्त केंद्र में जमा है लेकिन उन्हें ई उपार्जन पोर्टल की रसीद प्राप्त नहीं हुई है उनके पास सिर्फ कच्ची पर्ची है।

सिकमीनामो का फर्जी पंजीयन
पूरे मामले में यश भारत के पास पुख्ता जानकारी मिली है कि कुछ सिकमी नामें के फर्जी पंजीयन में एंट्री की गई है। जो की पूरी तरह से फर्जी है उसमें कोई भी उपज केंद्र में नहीं लाई गई थी, सिर्फ एंट्री हुई है जिस का गलत तरीके से पेमेंट निकालने के लिए प्रयोग किया गया है। जिसका खुलासा सबूत के साथ जल्द ही किया जाएगा जिसमें फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन तो कराया ही गया है साथ ही साथ एंट्री भी कराई गई है।
अधिकारी की भूमिका संदिग्ध
इस पूरे मामले में कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है जिसे जांच दल में भी शामिल किया गया है। जब इनके पास पूर्व में कृषि विभाग की कमान थी तो इस दौरान भी मझौली क्षेत्र में एक बड़ा मूंग का घोटाला सामने आया था इसके भुगतान अभी भी अटके हुए हैं, जिसमें उनके द्वारा बिना सिक्योरिटी के फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनी को मूंग खरीदी का काम दे दिया गया था और उसके बाद दूसरे साल भी मूंग की खरीदी में भी इन्होंने दो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों को मूंग का काम दिया था बाद में उन्हें जांच के बाद अलग किया गया और अब इस मामले में भी उक्त अधिकारी की एंट्री हो गई है जिसकी समिति के साथ मिली भगत है।
नेता कर रहे बचाने की कोसिस
इस पूरे मामले में जब जांच दल द्वारा गोदाम में गिनती की गई थी और दौरान क्षेत्र के ही एक बड़े नेता के द्वारा जिला मुख्यालय में करवाई रोकने के लिए दबाव बनाया गया। जिसके बाद ऑफ द रिकॉर्ड जांच दल द्वारा गोलमाल करने वाले व्यक्तियों को बुलाकर गिनती पूरी करने की बात कही गई जिस पर कुछ लोगों द्वारा उस समय सहमति भी दी गई लेकिन बाद में वे लोग पलट गए ऐसे में सवाल उठता है की चोरी पकडे जाने पर चोरी का सामान वापस करने की छूट आखिर क्यों दी जा रही है जबकि दूसरे मामलों में वरिष्ठ अधिकारी मामला दर्ज करने में देर नहीं लगाते और यहां हीला हवाली हो रही है।







