नेपाल एंबेसी में अर्चना की आईडी का किया वेरिफिकेशन, फिर ला सके वापस – हैदराबाद में तीन दिन रुकने के बाद काठमांडू पहुंच गई थी अर्चना

नेपाल एंबेसी में अर्चना की आईडी का किया वेरिफिकेशन, फिर ला सके वापस
– हैदराबाद में तीन दिन रुकने के बाद काठमांडू पहुंच गई थी अर्चना
भोपाल यशभारत। रानी कमलापति स्टेशन से 7 अगस्त को रहस्यमय ढंग से लापता हुई कटनी निवासी अर्चना तिवारी को ढूंढने में जीआरपी अमले को खासी मशक्कत करनी पड़ी है। अर्चना को नेपाल से वापस लाना इतना आसान नहीं था। अर्चना के नेपाल में होने की जानकारी लगने के बाद सबसे पहले जीआरपी का अमला इंदौर पहुंचा और वहां हॉस्टल से उसकी आईडी प्राप्त करने के बाद नेपाल एंबेंसी भेजा गया। जहां नेपाल एंबेंसी की टीम ने आईडी का वेरिफिकेशन किया। पूरी प्रक्रिया के बाद अर्चना को नेपाल पुलिस के घेरे में बार्डर पर लाया गया जिसके बाद उसे वापस भोपाल लाया जा सका है। बुधवार शाम ६ बजे बयान लेने के बाद अर्चना को उसके परिजनों को सौंप दिया गया है। कटनी पहुंचने के बाद परिजनों ने पूरी तरह से चुप्पी साध ली है। वहीं उसके भाई ने मीडिया और परिचितों से अपील की है कि मिलने कोई नहीं आए।
जीआरपी टीम ने भले ही मिसिंग मिस्ट्री सुलझा ली है, लेकिन कई सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब नहीं मिल सका है। मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अर्चना ने नेपाल जाने का ही प्लान क्यों बनाया था। वहां जाने का मकसद क्या था। नेपाल में जाने के लिए वहं की मुद्रा का इंतजाम कैसे किया। इसके अलावा अन्य कई सवाल हैं जिनका जवाब सामने आना बाकी है। हालांकि जीआरपी के जांच अधिकारियों ने अर्चना के मिलने के बाद राहत की सांस ली है।
अर्चना ने ही रची थी पूरी साजिश
अर्चना ने पूछताछ के दौरान जो जानकारी दी है वह चौंकाने वाली है। अर्चना के परिवार वाले उस पर शादी का दबाव बना रहे थे, इसलिए उसने घर से भागने की साजिश रची। तीन बार पहले भी शादी का रिश्ते ठुकरा चुकी थी। अर्चना ने अपने दोस्त शुजालपुर निवासी सारंश जोकचंद व सारंश के क्लाइंट पंजाब निवासी तेजिंदर के साथ मिलकर साजिश रची थी। मंगलवार सुबह जैसे ही अर्चना ने मां से बात की तो मां ने उसका लोकेशन पूछ लिया और इसकी जानकारी तुरंत जीआरपी के अधिकारियों को दी।
क्या पहले से थी रास्तों की जानकारी
अर्चना, सारांश व तेजिंदर एक साथ कार में निकले थे। यहां भी सवाल यह उठ रहा है कि क्या रास्तों की जानकारी तीनों को पहले से थी। पत्रकार वार्ता में जीआरपी एसपी ने बताया था कि प्लानिंग ऐसी की गई थी कि रास्ते में किसी तरह का टोल ना पड़े ताकि कैमरे में कार का नंबर ट्रेस ना हो सके। भोपाल से इटारसी और उसके बाद हैदराबाद, नेपाल तक जाने का सफर तय किया। किसी भी जगह ना तो कार दिखी और ना ही कार का नंबर ट्रेस हुआ। तो क्या कार कहीं भी हाईवे पर नहीं गई। ऐसा कौन सा शार्टकट इन तीनों ने अपनाया कि कहीं भी नजर नहीं आए।
रेल एसपी ने अर्चना मिसिंग केस में बताई यह कहानी
रेल एसपी राहुल लोढ़ा ने पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि ७ अगस्त को ट्रेन 18233 नमर्दा एक्स, कोच बी-3 बर्थ नम्बर 03 पर अर्चना तिवारी उम्र 29 वर्ष निवासी मंगलनगर थाना रंगनाथ नगर जिला कटनी (म.प्र.) पर अपने घर जाने की यात्रा कर रही थी। जो अपने घर नहीं पहुंची थी। भाई अंकुश तिवारी ने ८ अगस्त को जीआरपी कटनी में बहन के गुम होने की शिकायत दर्ज कराई थी। जीआरपी थाना कटनी द्वारा शून्य पर गम इंसान की कायमी कर घटना स्थल स्टेशन रानी कमलापति का होने से जीआरपी थाना कटनी से डायरी प्राप्त होने पर थाना जीआरपी रानी कमलापति में असल गुम इंसान क्रमांक 5/25 दिनांक को कायम कर जांच में लिया गया। गुम महिला अचर्ना तिवारी हाई कोर्ट में एडवोकेट एवं सिविल जज तैयारी इंदौर में रहकर कर रही थी।
जीआरपी ने चलया सर्चिंग अभियान
नर्मदा नदी में लगभग 32 किलोमिटर तक एसडीआरएफ एवं जीआरपी द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया व रानी कमलापति से जबलपुर तक अलग-अलग टीमें बनाकर पैदल सचिंग कराई गई एवं बरखेड़ा से बुदनी तक वन विभाग के साथ जीआरपी की टीमों के साथ जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, बाद इलेक्ट्रोनिक संसाधानो के माध्यम से संदेही के नंबर की जानकारी प्राप्त की गई, जिस पर से इंदौर एवं शुजालपुर में संदेही की पहचान सारांश जोकचंद के रूप में की जाकर पूछताछ की गई। जिसके बाद उप्र लखीमपुर के धनगढ़ी से अर्चना को बरामद कर लिया गया।
नेपाल की सिम का कर रही थी उपयोग
रेल एसपी के मुताबिक अर्चना ने बयान दिए हैं कि देवकोटा नेपाल की सिम दिलवाई थी। जिससे में वाट्सअप के माध्यम से सारांश से बात करती रही। सारांश ओर तेजिंदर ने दोस्त होने के कारण मेरी मदद की थी जिससे में नेपाल तक पहुंच गई थी किसी भी व्यक्ति द्वारा मेरे साथ कोई गलत हरकत की गई ना ही गलत काम किया गया था। सारांश के माध्यम से पुलिस ने मुझसे संपर्क किया और बताया कि आपके परिवार वाले बहुत परेशान है वापस आ जाओ बाद में काठमांडू से प्लेन से धनगढ़ी आई।
परिवार को सौंप दिया गया है
अर्चना को सकुशल परिवार को सौंप दिया
अर्चना को सकुशल परिवार को सौंप दिया गया है उसके बयान लिए गए हैं, जो भी स्थिति थी वह स्पष्ट हो गई है।
– राहुल लोढ़ा, एसपी, रेल भोपाल
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मसला पारीवारिक और 325 घंटे परेशान रहा पूरा सिस्टम
– स्वयं से योजना बना कर हुई थी गायब
– राज्य पुलिस की जगह रेल पुलिस भी योजना में शामिल…!
जबलपुर यशभारत। विगत 13 दिनों से यानी लगभग 325 घंटे पूरे सिस्टम के लिए परेशानी का सबब बनी कटनी निवासी एक युवती ने जिस तरह से योजनाबद्ध तरीके से सनसनी फैलाई वह न केवल गली कूचों में एक चर्चा का विषय बनी बल्कि मीडिया में भी सुर्खियों में रही। प्रतिदिन का अखबार उठाओ या फिर टीवी चैनल चालू करो सुर्खियों में एक ही खबर रहती थी कि आखिरकार युवती को जमीं खा गई है आसमां निकल गया। इस मामले ने पूरे सिस्टम की सांसें उस समय तक फूलीं रहीं जब तक की उसका कोई सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा। पूरे 13 दिन बाद रेल पुलिस ने अपनी योजना के मुताबिक पता लगा लिया तब कहीं जाकर तलाश में लगी अनेक टीमों ने न केवल राहत की सांस ली बल्कि उसकी एक पारिवारिक मसला ने सिलसिलेवार इस पूरी घटना की परत दर परत खोलकर रख दी। क्योंकि मामला पूरा योजना बद्ध तरीके से था इसलिए सिस्टम को इस रहस्य से पर्दा उठाना किसी चुनौती से कम नहीं था।
सात टीमों की थी नींद हराम
युवती ने पूरी योजना बनाकर जिस तरह से अपने आप को गायब बताया उससे पूरा सिस्टम परेशान था। तलाश के लिए जीआरपी आरपीएफ रेलवे की खुफिया शाखा फॉरेस्ट एनडीआरएफ एसडीआरएफ द्वारा तलाश के लिए ना तो दिन देखा ना रात यहां तक की नर्मदा के खर्राघाट में जहां कई किलोमीटर तक तलाश की गई वहीं किसी अपनी घटना को लेकर रेलवे ट्रैक पर भी नजर बनाए हुए थी।
कहां गया सिस्टम को गुमराह करने कानून
भारतीय संविधान में हर धाराएं तो फिर पूरे सिस्टम को गुमराह किए जाने को लेकर भी कोई धारा तो होगी जिसके तहत करवाई होना चाहिए यह इसलिए की इस तरह की पुनरावृति ना हो ना ही कोई युवती अपना बैग सीट पर छोड़ कर पुलिस को चकमा दे। यदि ऐसा नहीं तो यह पूरा सिस्टम इस तरह की गलतियों से ऐसे ही परेशान होता रहेगा …?







