आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े का आरोप, सृष्टि हॉस्पिटल संचालक पर FIR
एक ही नाम कई बार दर्ज करने और पैथोलॉजिस्ट के कथित फर्जी हस्ताक्षर से रिपोर्ट जारी करने का आरोप

एक ही नाम कई बार दर्ज करने और पैथोलॉजिस्ट के कथित फर्जी हस्ताक्षर से रिपोर्ट जारी करने का आरोप
जबलपुर,यशभारत। आयुष्मान भारत योजना में कथित फर्जीवाड़े के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने करोंद स्थित सृष्टि हॉस्पिटल के संचालक राजकुमार सूर्यवंशी और अन्य के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। जांच में प्रथम दृष्टया सामने आया कि अस्पताल ने योजना में सूचीबद्ध होने के लिए डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों की सूची में एक ही नाम कई बार दर्ज किए। इसके अलावा, एक पैथोलॉजिस्ट के नाम, पंजीयन नंबर और सील का इस्तेमाल कर कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों वाली जांच रिपोर्टें जारी की गईं। EOW ने 5 अक्टूबर 2026 को भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
45 प्रविष्टियों में करीब 15 अलग-अलग नाम
जांच के अनुसार, सृष्टि हॉस्पिटल वर्ष 2023 में आयुष्मान भारत योजना में सूचीबद्ध हुआ था। अस्पताल ने योजना के ऑनलाइन पोर्टल पर डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की 45 प्रविष्टियां दर्ज की थीं, लेकिन इनमें अलग-अलग नाम करीब 15 ही पाए गए। कई डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों के नाम चार-चार बार तक दोहराए गए। हैरानी की बात यह भी सामने आई कि सभी 45 प्रविष्टियों के सामने अस्पताल संचालक का एक ही मोबाइल नंबर दर्ज था। जांच में सूची में शामिल एक महिला पैथोलॉजिस्ट ने बताया कि उन्होंने कभी सृष्टि हॉस्पिटल में काम नहीं किया। उन्होंने न तो अपने दस्तावेज अस्पताल को दिए थे और न ही अपने नाम के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। उनके अनुसार, नाम हटाने के लिए कहने के बावजूद सूची में उनका नाम बना रहा।
पैथोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर भी कथित तौर पर फर्जी
EOW की जांच में अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग के नाम से जारी जांच रिपोर्टों में भी अनियमितताएं सामने आईं। रिपोर्टों पर एक एमडी पैथोलॉजिस्ट का नाम, पंजीयन नंबर और सील दर्ज थी। संबंधित डॉक्टर ने जांच के दौरान इन रिपोर्टों पर किए गए हस्ताक्षरों को अपना मानने से इनकार किया और उन्हें अपने वास्तविक हस्ताक्षरों से अलग बताया। जिला स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में भी अस्पताल को पैथोलॉजी लैब संचालित करने की अनुमति दर्ज नहीं मिली। जांच में ऐसी कई रिपोर्टें सामने आईं, जो कथित तौर पर विवादित हस्ताक्षरों के साथ जारी की गई थीं और संबंधित मरीजों का इलाज आयुष्मान योजना के तहत दर्शाया गया था। अस्पताल संचालक ने अपने लिखित जवाब में इन मरीजों के योजना के तहत भर्ती होने की बात स्वीकार की थी। योजना के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2025 में अस्पताल में 709 हितग्राहियों का इलाज दर्ज किया गया।
दस्तावेज नहीं देने पर बढ़ा संदेह
जांच एजेंसी के अनुसार, बार-बार मांगने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन डॉक्टरों के नियुक्ति पत्र, वेतन और उपस्थिति संबंधी रिकॉर्ड, पैथोलॉजी संचालन की अनुमति तथा मरीजों की उपचार फाइलें उपलब्ध नहीं करा सका। इन तथ्यों के आधार पर राजकुमार सूर्यवंशी और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।







