Top-5इंदौरकटनीग्वालियरजबलपुरदेशभोपालमंडलामध्य प्रदेशमध्यप्रदेशमुख्य ख़बरेंमुंबईराज्य

हत्या के बाद शव के टुकड़े कर सीमेंट से ड्रम में छिपाया था

सौरभ राजपूत हत्याकांड में बड़ा फैसला, मुस्कान-साहिल को फांसी की सजा

 हत्या के बाद शव के टुकड़े कर सीमेंट से ड्रम में छिपाया था

मेरठ, यश भारत।  देशभर में चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड यानी नीला ड्रम मामले में अदालत ने दोषी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में बुधवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष ने अपराध की क्रूरता और शव को छिपाने के तरीके का हवाला देते हुए दोनों के लिए कड़ी सजा की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने मुस्कान की दो बेटियों के भविष्य और परवरिश का मुद्दा उठाते हुए नरमी बरतने की अपील की।

फैसला सुनते ही भावुक हुए दोनों दोषी

सजा सुनाए जाने से पहले मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। न्यायालय ने दोनों को अपनी बात रखने का अवसर दिया। दोनों ने कहा कि उन्हें कुछ नहीं कहना है। फैसला सुनाए जाने के दौरान मुस्कान हाथ जोड़कर खड़ी रही और बाद में रोने लगी। साहिल की आंखें भी नम हो गईं। मुस्कान की ओर से बचाव पक्ष ने उसकी दो बेटियों के भविष्य और पालन-पोषण का हवाला देते हुए कम सजा देने की मांग की। वहीं, अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि अपराध की प्रकृति और उसे अंजाम देने के बाद शव छिपाने का तरीका बेहद गंभीर है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मृत्युदंड का फैसला सुनाया।

ऐसे हुआ था नीले ड्रम हत्याकांड का खुलासा

मामले का खुलासा मार्च 2025 में सौरभ राजपूत के लापता होने की शिकायत के बाद हुआ। पुलिस के अनुसार, 18 मार्च को सौरभ के भाई बबलू ने उसकी गुमशुदगी की सूचना दी थी। शिकायत में पत्नी मुस्कान और साहिल पर संदेह जताया गया था। पुलिस ने जांच शुरू की और पूछताछ के साथ अन्य साक्ष्य जुटाए। बाद में घर में रखे नीले ड्रम से सौरभ का शव बरामद हुआ, जिसके बाद यह मामला देशभर में सुर्खियों में आ गया।

नशीली दवा देने और शव छिपाने का आरोप

पुलिस जांच के अनुसार, वारदात वाली रात सौरभ के खाने में नशीली दवा मिलाने का आरोप है। उसके बेसुध होने के बाद साहिल को घर बुलाया गया। अभियोजन के मुताबिक, इसके बाद सौरभ की हत्या की गई और शव के टुकड़े कर उन्हें छिपाने की कोशिश की गई। अंततः शव को नीले ड्रम में रखकर सीमेंट से छिपाया गया।

कैब, होटल और मोबाइल लोकेशन से जुड़े साक्ष्य

मामले में प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने के कारण पुलिस ने परिस्थितिजन्य, इलेक्ट्रॉनिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर जांच की। जांच में कैब चालक के बयान, होटल से जुड़े रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल की कॉल डिटेल और लोकेशन जैसे साक्ष्य अहम रहे। अभियोजन पक्ष ने इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत में अपना पक्ष रखा। सजा सुनाए जाने के साथ ही इस बहुचर्चित मामले में अदालत का फैसला सामने आया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button