भोपाल

प्रधानमंत्री के दौरे से फिर टली प्रशासनिक सर्जरी – डेढ़ दर्जन से अधिक अफसरों के होंगे तबादले, मैदानी अफसर आएंगे वल्लभ भवन

प्रधानमंत्री के दौरे से फिर टली प्रशासनिक सर्जरी – डेढ़ दर्जन से अधिक अफसरों के होंगे तबादले, मैदानी अफसर आएंगे वल्लभ भवन

भोपाल यशभारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक दिवसीय प्रवास पर 31 मई को भोपाल आ रहे हैं। उनके दौरे के चलते चल रही प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी रोक दी गई है। इस सर्जरी के लिए शासन व सरकार स्तर पर पूरी तैयारी कर ली गई थी। जिससे माना जा रहा था कि इसी हफ्ते पदस्थापना सूची जारी हो जाएगी। इस सूची में कई बड़ेे विभागों के मुखिया बदले जाने हैं। यह वे अफसर है जिनके कामकाज से सरकार के साथ ही जन प्र्रतिनिधि खुश नही हैं। यह पूरी कवायद विकास कामों में गति देने के लिए की जा रही है। इस सर्जरी की तैयारी तो बीते माह ही कर ली गई थी , लेकिन कोई न कोई ऐसा कारण सामने आ जाता है जिससे सूची को रोकना पड़ जाता है। पहले पहलगाम घटना की वजह से पाकिस्तान के साथ तनाव उत्पन्न हो गया और सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखने की प्राथमिकता सामने आ गई। इस बीच सरकार के मंत्री विजय शाह के एक बयान ने सरकार को बैकपुट पर खड़ा कर दिया तो वरिष्ठ अधिकारियों के तबदालों की सूची को रोकना पड़ा। इसके बाद अब भोपाल में महिला सशक्तिकरण को लेकर एक बड़े आयोजन में प्रधानमंत्री की मौजूदगी की वजह से तबादला सूची की फाइल रोक दी गई है। मंत्रालय से जुड़े सूत्र बताते हैं कि सरकार बड़े विभागों में ऐसे अधिकारियेां को बैठाने की तैयारी में है जो टास्क मास्टर हो यानि की सरकार द्वारा बनाई गई रणनीति को पूरा करने में सक्षम हों। इसके अलावा इन विभागों में मुख्यमंत्री को समझने वाले अधिकारियों को भी अहम जिम्मेदारी दी जाएगी। मैदानी पदस्थापना में भी ऐसे ही अधिकारी तैनात किए जाने हैं जो अपनी क्षमता का सर्वश्रेष्ठ उपयोग कर सरकार की मंशा पर पूरी तरह से ख्रा उतर सकें। छह कलेक्टर व दो संभागायुक्त बदले जाएंगे सूत्रों की माने तो प्रशासनिक फेरबदल की जब भी सूची जारी होगी तब छह से ज्यादा जिलों के कलेक्टर, दो संभागायुक्त का तबादला होना लगभग तय है। इनके अलावा अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और कुछ सचिव स्तर के अधिकारी भी बदले जा सकते हैं। कहा जा रहा है कि कुछ बड़े जिलों और संभागीय मुख्यालयों में बड़े अफसरों को लेकर मंत्रियों, वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के मध्य आम सहमति नहीं बन पा रही है। जिसकी वजह से इन स्थानों के लिए अधिकारियेां के नाम पर अंतिम फैसला नहीं हो पा रहा है। सूत्रों का कहना है कि दो वरिष्ठ मंत्रियों के बीच संभागयुक्त और कलेक्टर के लिए अलग अलग अधिकारियों के नाम सीएम को सुझाए गए हैं। इस पर कोई भी मंत्री अपना नाम वापस लेने को तैयार नही है। जिससे वहां पर टकराहट जैसी स्थिति बन रही है। सूची को पीएम के दौरे तक टालने की वजह यह भी मानी जा रही है। बताया गया है कि सीएम ने इस मामले को प्रधानमंत्री के दौरे के बाद देखने को कहा है। स्थानांतरण छूट भी एक वजह राज्य सरकार ने 1 से 31 मई के बीच तबादला प्रतिबंध हटाया है। 

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