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151 शेरों के रथ पर सवार होगी आदि शक्ति जगत जननी मदन महल स्टेशन के पास तैयार हो रहा भव्य पंडाल

72 साल से की जा रही है प्रतिमा की स्थापना

151 शेरों के रथ पर सवार होगी आदि शक्ति जगत जननी
मदन महल स्टेशन के पास तैयार हो रहा भव्य पंडाल
72 साल से की जा रही है प्रतिमा की स्थापना

जबलपुर यश भारत।  शहर में नवरात्रि की तैयारी अब अंतिम चरणों में है। शक्ति आराधना के इस पर्व को प्रारंभ होने में मात्र 3 दिन शेष बचे हैं। ऐसे में सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समितियोँ के द्वारा अनुकृति पंडाल और झांकियां को अंतिम स्वरूप देने की कवायत तेज हो गई है। इसी क्रम में श्री सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति मदन महल स्टेशन के पास इस वर्ष 151 शेरों से सुसज्जित रथ का निर्माण किया जा रहा है और इसी रथ पर सवार होकर 14 फीट की मां भगवती की प्रतिमा भक्तों को दर्शन देंगी।
समिति के द्वारा इसके लिए 80 गुणित 60 फीट का विशाल पांडाल तैयार किया जा रहा है। जिसे तैयार करने का जिम्मा भानतालैया के किशन कुशवाहा और उनकी टीम के हवाले है जो रात दिन एक करके इसे तैयार करने में लगे हैं इसकी अनुमानित लागत करीब साढे पांच लाख रुपए बताई गई है जबकि पूरे आयोजन में 8 से 9 लाख रूपी खर्च होने का अनुमान बताया गया है।
दुर्गा उत्सव समिति के अध्यक्ष  राजेंद्र रजक कल ने जानकारी देते हुए बताया कि समिति के द्वारा विगत 72 साल से यहां प्रतिमा की स्थापना की जा रही है। समिति के संरक्षक वर्तमान में नगर निगम के महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू है जिनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन समिति को प्राप्त हो रहा है। श्री रजक के अनुसार पंचमी से आम श्रद्धालु माता रानी के दर्शन कर सकेंगे। समिति के द्वारा प्रतिवर्ष समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है और भव्य विसर्जन जुलूस भी निकाला जाता है जो इस वर्ष 4 तारीख को पूरी भव्यता के साथ निकलेगा और गौरी घाट स्थित विसर्जन कुंड में मां भगवती का पूजन अर्चन के उपरांत विधिवत्त विसर्जन किया जाएगा।
पूर्व वर्षों में बनाई गई झांकियां भी रह चुकी हैं चर्चित
समिति के द्वारा पूर्व वर्षों में भी एक बढ़कर एक झांकियां और अनुकृतियों का निर्माण किया गया है जो काफी चर्चित भी रही है। 108 शेरो वाली माता 100 शेरों का रथ 51 शेर हजार भुजाओं वाली माता रानी 12 ज्योतिर्लिंग अमरनाथ केदारनाथ धाम जैसी झांकियां का निर्माण करके समिति ने शहर में अपनी एक अलग पहचान बनाई है और समिति का यही प्रयास रहता है कि हर वर्ष कुछ अलग हटकर किया जाए।

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