गेहूं खरीदी में बड़ा बदलाव , करीब 10 अप्रैल से शुरू होगी गेहूं की खरीद , छोटे किसानों को पहले मिलेगा मौका 7 से 10 अप्रैल तक बुकिंग, सीएम डॉ. मोहन यादव सख्त कतारें ना लगें और भुगतान जल्द से जल्द करें

- गेहूं खरीदी में बड़ा बदलाव , करीब 10 अप्रैल से शुरू होगी गेहूं की खरीद , छोटे किसानों को पहले मिलेगा मौका
- 7 से 10 अप्रैल तक बुकिंग, सीएम डॉ. मोहन यादव सख्त कतारें ना लगें और भुगतान जल्द से जल्द करें
- भोपाल यश भारत। मध्य प्रदेश में इस बार गेहूं खरीदी व्यवस्था पूरी तरह बदली नजर आएगी। किसानों को भीड़ और लंबी कतारों से राहत देने के लिए राज्य सरकार ने 7 से 10 अप्रैल तक स्लॉट बुकिंग की व्यवस्था लागू की है। इसके तहत किसान तय समय पर ही अपनी उपज लेकर केंद्र पहुंचेंगे, जिससे अव्यवस्था और इंतजार की समस्या खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समत्व भवन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लेकर अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि इस बार खरीदी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि खरीदी केंद्रों पर ट्रैक्टर , ट्रॉलियों की लंबी कतारें बिल्कुल नहीं लगनी चाहिए और किसानों को व्यवस्थित व सम्मानजनक तरीके से सेवा मिले।
सरकार ने इस बार छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है, ताकि उन्हें सबसे पहले अपनी फसल बेचने का अवसर मिल सके। मुख्यमंत्री ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि खरीदी के बाद किसानों के खातों में भुगतान कम से कम समय में सीधे पहुंच जाए जिससे आर्थिक दबाव कम हो। रिकॉर्ड पंजीयन, बड़ा उपार्जन लक्ष्य उपार्जन वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश में करीब 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है। इस सीजन में लगभग 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का अनुमान जताया गया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में बड़ा लक्ष्य माना जा रहा है। बारदान और व्यवस्थाओं पर फोकस इतनी बड़ी मात्रा में खरीदी के लिए करीब 3 लाख 10 हजार से अधिक बारदान की जरूरत होगी। सरकार ने इसके लिए पहले से तैयारी करते हुए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने का दावा किया है। साथ ही अन्य एजेंसियों से भी लगातार बारदान मंगाया जा रहा है और खरीदी प्रक्रिया को तेज किया गया है। प्रदेश सरकार इस बार तकनीक आधारित स्लॉट सिस्टम, बेहतर प्रबंधन और समयबद्ध भुगतान के जरिए खरीदी प्रक्रिया को सुचारू बनाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।







