

कटनी, यशभारत। मणप्पुरम गोल्ड लोन फाइनेंस बैंक में डकैती की सनसनीखेज वारदात के तीन दिन बीतने के बाद भी पुलिस फरार मुख्य आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई है। पुलिस को न तो इन बदमाशों का कोई पुख्ता सुराग हाथ लगा है और न ही लूटा गया सोना और नगद रूपए मिले हैं, इसके बावजूद मंडला पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों को अपने कब्जे में लेकर कटनी पुलिस वाहवाही लूटने में लगी हुई है। जिले के इतिहास में हुई अब तक की सबसे बड़ी डकैती की वारदात को जिले के पुलिस अधिकारियों ने कितने हल्के में लिया, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वारदात के बाद जहां जबलपुर रेंज के आईजी उमेश जोगा ने घटना की गंभीरता को देखते हुए संभाग के सभी जिलों की पुलिस को तत्काल एक्टिव किया तो वहीं कटनी जिले की पुलिस दो घंटे तक सीसीटीव्ही फुटेज तक नहीं जुटा पाई थी। कहा यही जा रहा है कि यदि आईजी सक्रिय न होते इन दो आरोपियों की गिरफ्तारी भी न हो पाती और पुलिस के हाथ खाली रह जाते। इन दो आरोपियों के पकड़े जाने से कम से कम गिरोह का तो पता चल गया। बहरहाल लुटेरों की गिरफ्तारी के लिए कटनी पुलिस बिहार पहुंच गई है और पूछताछ के आधार पर मिले सुरागों और मुखबिरों की सूचना के आधार पर फरार बदमाशों की पतासाजी कर रही है।
आरोपियों ने मीडिया से कहा : हमने कुछ नहीं किया
रविवार की शाम पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित पत्रकारवार्ता में पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार जैन ने पत्रकारों को बताया था कि पकड़े गए दोनों आरोपियों शुभम तिवारी एवं अंकुश साहू ने मणप्पुरम गोल्ड लोन फाइनेंस बैंक में डकैती की वारदात को अंजाम दिया जाना कबूल कर लिया है और पूछताछ में अपने गिरोह और फरार अन्य आरोपियों के बारे में जानकारी दी है, लेकिन कल सोमवार को जब न्यायालय में आरोपियों को पेश किया जा रहा था, उस समय आरोपियों ने मीडया से कहा कि उन्होंने कुछ नहीं किया है और वारदात को अंजाम दिया जाना भी स्वीकार नहीं किया है।
सवाल : कहां से आया कट्टा और 20 हजार रूपए
इस पूरे मामले में कटनी और मंडला पुलिस के अलग-अलग बयान को लेकर भी कटनी पुलिस की कार्यप्रणाली पर उंगली उठ रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक मंडला पुलिस ने डकैती के आारोपी इन दोनों बदमाशों शुभम तिवारी एवं अंकुश साहू को जब गिरफ्तार किया तो उनके पास से केवल मोटर साइकिल बरामद की गई थी, लेकिन कटनी पुलिस जब आरोपियों को लेकर यहां पहुंची तो उनके पास से देशी कट्टा, जिन्दा कारतूस एवं 20 हजार रूपए नगद बरामद होने की जानकारी मीडिया को दी गई। इसका खुलासा तब हुआ, जब मंडला पुलिस ने आरोपियों के पास से केवल मोटर साइकिल बरामद होने का बयान दिया।
न्यायालय से मिला 10 दिन का पुलिस रिमांड
मणप्पुरम गोल्ड लोन फाइनेंस बैंक में दिन दहाड़े डकैती के दोनों आरोपियों को पुलिस ने सोमवार को न्यायालय में पेश किया। पुलिस ने आरोपियों को डकैती व अन्य फरार आरोपियों के बारे में पूछताछ के लिए 10 दिन की रिमांड पर लिया है। पुलिस ने जिला अस्पताल में दोनों बदमाशों शुभम तिवारी व अंकुश साहू का मुलाहजा कराया। आरोपियों को न्यायालय से रिमांड पर लेने के बाद पुलिस ने उनसे वारदात के के संबंध में विस्तृत पूछताछ की। पुलिस बदमाशों की कॉल डिटेल, ठिकाना आदि की जानकारी जुटा रही है। आरोपियों के किनसे संपर्क हैं और इसके पहले कहां-कहां वारदातों को अंजाम दिया है, उसका भी पता लगा रही है।
120 से ज्यादा अधिकारी कर्मचारियों की 12 टीमें
बताया जाता है कि मणप्पुरम गोल्ड लोन फाइनेंस बैंक में डकैती की वारदात का पर्दाफाश करने के लिए 120 अधिकारियों-कर्मचारियों की 12 टीमें बिहार, मंडला, डिंडौरी, जबलपुर, नरसिंहपुर सहित अन्य जिलों में बदमाशों की तलाश में जुटी हुई हैं। जांच के दौरान पुलिस को बिहार राज्य में पंजीकृत एक अन्य कार की लोकेशन वारदात के दिन पन्ना नाका में 10 बजकर 48 मिनट पर व गोसलपुर में 11.54 में लोकेशन मिली है, जिसकी तलाश की जा रही है।
दीवाली के पहले जेल से आया था बदमाश
डकैती की वारदात में शामिल गिरफ्तार आरोपी शुभम तिवारी पत्रकार नगर थाना पटना बिहार का रहने वाला है, जिसकी आपराधिक कुंडली खंगालने पर पुलिस को पता चला है कि यह दो साल से जेल में बंद था। उस पर एनडीपीएस, चोरी आदि के अपराध दर्ज हैं। वह दीपावली के कुछ दिन पहले जेल से छूटकर संघमित्रा एक्सप्रेस से कटनी आया था। दूसरा आरोपी अंकुश साहू उर्फ विवेक थाना पांडेपुर थाना मुरार जिला बक्सर बिहार का रहने वाला है। वह 307 के अपराध में जेल जा चुका है। जेल में ही दोनों की सुबोध सिंह से दोस्ती हुई और गिरोह बनाकर इस वारदात को अंजाम दिया।
जबलपुर में दो बदमाशों की लोकेशन ट्रेस
डकैती की वारदात में शामिल दो बदमाशों की लोकेशन जबलपुर में भी मिली है। पुलिस ने बताया कि कुंडम से बाइक छोड़कर भागने वाले बदमाश बस का सहारा लेकर मालगोदाम जबलपुर तक पहुंचे। इसके बाद उनका कोई पता नहीं लग पाया है।बिहार में पंजीकृत जिस कार का पुलिस को वारदात में उपयोग किए जाने का शक था, वह नरसिंहपुर में मिली। कार का उपयोग करने वाले दो लोगों से नरसिंहपुर पुलिस व कटनी पुलिस ने पूछताछ की तो चला चला कि वे लोग पीएचई का काम करने वाले एक एजेंसी के कर्मचारी हैं। पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें जाने दिया।







