
कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा से नवनिर्वाचित मेयर विक्रम अहाके आज भोपाल आए। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में मीडिया से चर्चा करते हुए अपनी जिंदगी और हालिया चुनावी माहौल से जुड़े अनुभव शेयर किए। विक्रम अहाके ने कहा- जीवन में नहीं सोचा था कि इतनी बड़ी उपलब्धि, इतना बड़ा मौका मेरे जीवन में आएगा। मैं कमलनाथजी की विचारधारा से, कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ा और निरंतर चलता रहा।
संघर्षों से जीवन निकलकर आया। मुझे नहीं पता था कि मेरी तस्वीरें वायरल हो जाएंगी। वो तो मैंने अपने पिछले दिनों में सोशल मीडिया अकाउंट में डाला था। चुनाव जीतने के बाद लोगों ने खोजा तो तस्वीरें सामने आईं, जिसमें पत्तल बनाते हुए, लकड़ियां उठाते हुए, खेती का काम करते हुए, साइकिल चलाते हुए की तस्वीरें हैं। मैंने बचपन से संघर्ष किया है।
विक्रम ने कहा- मैं कमलनाथजी के समक्ष टिकिट मांगने भोपाल नहीं आया। न ही वहां किसी तरह से दावेदारी पेश की। उन्होंने मुझे कब परखा, कब समझा, यह बात मुझे पता नहीं चली। सोशल मीडिया में कांग्रेस के पेज से पहली बार सूची जारी हुई तो उसे पढ़ने लगा, मुझे अंदाजा नहीं था कि मेरा नाम भी सूची में होगा। मुझे समझ नहीं आया कि क्या हो गया।
स्कूल के वक्त किताब, बैग खरीदने की भी दिक्कत थी
विक्रम ने बताया- मेरे पिता किसान हैं। हमारी एक-दो एकड़ जमीन है। बड़े किसान नहीं हैं। मम्मी 1998 से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। जब मेरी उम्र 8-9 साल थी और उनको लगभग 400 रुपए पेयमेंट मिलती थी। प्राथमिक शिक्षा से ही बहुत संघर्ष किया। काॅपी-किताब और बैग खरीदने के लिए ही दिक्कत होती थी। बैग नहीं होता था, थैली में काॅपी-किताब रखकर तीन-चार किलोमीटर हमारे स्कूल सिंगौड़ी जाया करते थे। फर्स्ट ईयर तक शादियों में कैटरिंग का काम किया है। शादियों में प्लेट उठाने तक का काम किया। मजदूरी का काम किया। साइकिल से पोस्टर बेचने जाया करता था।

कभी नहीं सोचा था कि राजनीति में आऊंगा
संघर्ष मैंने हर पल किया। कभी नहीं सोचा था कि राजनीनीति में आऊंगा। गांव में कुछ लोगों की मदद कर देता था तो आत्मसंतुष्टी मिलती थी कि किसी के लिए हमने कुछ अच्छा किया है। धीरे-धीरे यह जिज्ञासा बढ़ने लगी। जब छिंदवाड़ा पीजी कॉलेज में फर्स्ट ईयर क्लास पढ़ना चालू किया, उस समय गांव के लोगों के साथ वहां अन्याय, अत्याचार, शोषण होता था तो अंदर से तकलीफ होती थी। वहां गांव के लोगों के साथ ही एक यूनिटी बनाई। उस समय एनएसयूआई के साथ नहीं जुड़ा था। फिर उनके अधिकारियों, आदिवासी युवाओं के अधिकारों के लिए लड़ना शुरू किया। एनएसयूआई के साथ जुड़ा। आगे युवा कांग्रेस से जुड़ा। कमलनाथ जी का सबसे कम उम्र का सांसद प्रतिनिधि बना। लेकिन, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे छिंदवाड़ा जैसी प्रतिष्ठित सीट, कमलनाथजी के गृहजिले से महापौर बनने का मौका मिलेगा।
चुनाव में मानिसक तनाव भी था
विक्रम अहाके ने कहा- छिंदवाड़ा कमलनाथजी की सीट होने के कारण मानसिक तनाव ज्यादा था। चुनाव के दौरान शिवराज दो-दो बार गए। वहां प्रत्याशी बदला गया। सत्ता की भूख ऐसी थी कि उन्होंने नगर निगम के सहायक आयुक्त का इस्तीफा दिलाकर चुनाव लड़वाया। मानसिक तनाव था, प्रशासन और सत्ता बीजेपी की थी। उन्होंने पैसा और पावर का पूरा उपयोग किया। मतगणना तक पूरा प्रयास किया कि छिंदवाड़ा की सीट हरवाई जाए। लेकिन जनता ने हमारा साथ दिया। अहाके ने कहा कि उम्र कम है, अनुभव कम है लेकिन काम करने का जज्बा ज्यादा है। जहां कमलनाथ और नकुलनाथ का नाम आता है, वहां विकास खुद व खुद चलकर आता है। उनके मार्गदर्शन छिंदवाड़ा को अच्छी गति से आगे बढाएंगे।







