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डीजीपी के कार्यकाल विस्तार के प्रस्ताव पर जेल डीजी की आपत्ति से गरमाई सियासत

मध्य प्रदेश पुलिस मुखिया की रेस: तकनीकी पेंच से बदली हलचल, 1991 बैच के अफसरों की बढ़ी धड़कनें

डीजीपी के कार्यकाल विस्तार के प्रस्ताव पर जेल डीजी की आपत्ति से गरमाई सियासत

दो दिन के फेरबदल से वरिष्ठ आईपीएस वरुण कपूर के बाहर होने की चर्चाएं तेज

भोपाल, यसभारत। मध्य प्रदेश के नए पुलिस महानिदेशक के चयन की प्रक्रिया अब केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक दिलचस्प और पेच कानूनी-प्रशासनिक ड्रामे में तब्दील हो गई है। मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाना के रिटायरमेंट से ठीक पहले आए एक नए प्रस्ताव ने पुलिस मुख्यालय से लेकर गलियारों तक हलचल तेज कर दी है। इस तकनीकी फेरबदल का सीधा असर 1991 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के भविष्य पर पड़ता नजर आ रहा है।

चर्चा है कि मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाना की रिटायरमेंट तिथि 30 नवंबर को दो दिन बढ़ाकर 2 दिसंबर करने की तैयारी चल रही है, जिसके लिए गृह विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। लेकिन इस दो दिन के कार्यकाल विस्तार पर खुद डीजीपी चयन पैनल में शामिल वरिष्ठ आईपीएस एवं जेल डीजी करण कपूर ने नियमों का हवाला देते हुए आपत्ति जता दी है। श्री कपूर ने इस संबंध में मुख्य सचिव और जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की है। जानकारों का मानना है कि यदि यह दो दिन का विस्तार लागू होता है, तो इसका सबसे बड़ा झटका 1991 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और डीजी जेल वरुण कपूर को लग सकता है, और वे डीजीपी की इस रेस से बाहर हो सकते हैं।

दौड़ में तीन नाम, पहली महिला डीजीपी बनने पर भी टकटकी

संघ लोक सेवा आयोग को भेजे गए 12 नामों के पैनल में से नवंबर के पहले हफ्ते में दिल्ली में होने वाली हाई लेवल मीटिंग में तीन नामों का फाइनल पैनल तय होना है। फिलहाल जिन तीन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें शामिल हैं

1. प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव (डीजी, होमगार्ड): यदि मुख्यमंत्री इनके नाम पर मुहर लगाते हैं, तो यह मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली महिला डीजीपी बनकर नया इतिहास रचेंगी। इनका कार्यकाल नवंबर 2029 तक रह सकता है, जिसमें कई बड़े चुनाव और सिंहस्थ जैसे आयोजन शामिल हैं।
2. वरुण कपूर (डीजी, जेल): वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर हैं, लेकिन कार्यकाल विस्तार के नए पेंच के कारण इनकी राह में अड़चनें आती दिख रही हैं।
3. उपेंद्र जैन (डीजी,  ईओडब्ल्यू): आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के लंबे अनुभव के साथ इनका कार्यकाल भी नवंबर 2029 तक का बनता है, जिससे यह भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के नियमों का कड़ा पहरा

इस बार चयन प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के दो कड़े नियम निर्णायक साबित हो रहे हैं पहला, रिटायरमेंट में कम से कम 6 महीने की सेवा बाकी होना और दूसरा, 12 फरवरी 2026 के ताजा निर्देश के मुताबिक कानून-व्यवस्था, क्राइम ब्रांच, ईओडब्ल्यू या इंटेलिजेंस जैसी विंग्स में कम से कम 10 साल का कोर पुलिसिंग अनुभव होना अनिवार्य है।

फिलहाल, डीजीपी की कुर्सी को लेकर प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज है और सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस तकनीकी पेंच और कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव पर क्या अंतिम निर्णय लेती है।

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