चल समारोह में चोरों का तांडव: आधा दर्जन से अधिक लोगों की जेब कटी, फरियादियों की नहीं हुई सुनवाई

चल समारोह में चोरों का तांडव: आधा दर्जन से अधिक लोगों की जेब कटी, फरियादियों की नहीं हुई सुनवाई
कोतवाली पुलिस की टालमटोल से आक्रोश, एफआईआर दर्ज करने के बजाय थमाया कागजी कार्रवाई का बहाना
भोपाल,यशभारत। राजधानी में धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों चल समारोह के दौरान उमड़ने वाली भीड़ का फायदा उठाकर चोर-उचक्के सक्रिय हो गए हैं। ताजा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है, जहां झांकियां देखने आए आधा दर्जन से अधिक श्रद्धालु एवं आम नागरिक चोरी का शिकार हो गए। पीड़ित सुबह से दोपहर तक कोतवाली थाने के चक्कर काटते रहे, लेकिन पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करने के बजाय फरियादियों को टालमटोल कर बैरंग लौटा दिया।
नींद लगते ही कट गई जेब, मोबाइल और नकदी पार
पीड़ित रवि खांडे ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि वे बीती रात झांकियां देखने आए थे। देर रात अत्यधिक थकान के कारण वे कमल एंटरप्राइजेज नामक दुकान के पास बैठ गए, जहां उन्हें नींद आ गई। तड़के कुछ आहट होने पर जब उनकी नींद खुली, तो उन्होंने देखा कि कुछ संदिग्ध युवक उनके पास से तेजी से भाग रहे हैं। जेब टटोलने पर उनके होश उड़ गए उनकी जेब में रखे दो कीमती मोबाइल, जरूरी दस्तावेज और 3,500 रुपये नकद गायब थे।
7 घंटे बैठाकर रखा, फिर बोले गुम दर्ज कराओ
रवि खांडे सुबह 8 बजे ही शिकायत दर्ज कराने कोतवाली थाने पहुंचे थे। उनके साथ-साथ करीब एक दर्जन अन्य पीड़ित भी अपनी-अपनी चोरी की फरियाद लेकर थाने के बाहर खड़े थे। पीड़ितों का आरोप है कि सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक (लगभग 7 घंटे) उन्हें थाने में बिठाकर रखा गया। कभी आवेदन देने की बात कही गई, तो कभी एफिडेविट लाने का फरमान सुना दिया गया। बाद में अधिकारी अभी नहीं आए हैं का बहाना बनाकर पीड़ितों को टरकाया गया। अंत में पुलिस अधिकारियों ने चोरी की एफआईआर लिखने से साफ मना कर दिया और गुमशुदगी का आवेदन जमा करने की सलाह देकर वापस भेज दिया।
पुलिस के रवैये से जनता का उठ रहा विश्वास
लाखों की भीड़ वाले आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे करने वाली पुलिस की इस कार्यप्रणाली से आम नागरिकों में भारी निराशा और असंतोष है। फरियादियों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने के बजाय आंकड़ों को छिपाने के लिए गुमशुदगी का रूप देने की इस टालमटोल वाली नीति से पुलिस की छवि पर सवाल खड़े हो रहे हैं। थाने से निराश होकर लौटे लोगों का कहना है कि जब राजधानी के मुख्य थाने में ही फरियाद नहीं सुनी जा रही, तो आम जनता अपनी सुरक्षा की उम्मीद किससे करे?






