बदलते दौर में आज भी महिलाओं की पहली पसंद है चाट और फुलकी, फेस्टिव सीजन में प्रतिदिन बिक रही 2 से 3 लाख फुलकी

जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर की भव्य और प्रसिद्ध नवरात्रि उत्सव के दौरान शहर का हर कोना आस्था और उत्सव के उल्लास में डूबा हुआ है। आकर्षक साज-सज्जा और भव्य प्रतिमाओं के दर्शन के लिए सड़कों पर लाखों का जनसैलाब उमड़ रहा है। उत्सव के इस माहौल के बीच ‘यश भारत’ की टीम जब धरातल पर रिपोर्टिंग कर रही थी, तब हमारी नजर शहर के प्रमुख चौराहों और पूजा पंडालों के आसपास लगी खाने-पीने की दुकानों और ठेलों पर जुटी भारी भीड़ पर गई। टीम द्वारा किए गए मूल्यांकन और कई अनुभवी चाट-फुलकी व्यवसायियों से हुई बातचीत के बाद बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
बदलते स्वाद के बीच भी बरकरार है पारंपरिक जलवा
आज के दौर में भले ही फास्ट फूड, चाइनीज और इटैलियन फूड का चलन बढ़ा हो, लेकिन जब बात फेस्टिव सीजन के स्वाद की आती है, तो महिलाओं और युवाओं की पहली पसंद आज भी चटपटी चाट और फुलकी ही बनी हुई है। शहर में स्थान-स्थान पर आयोजित होने वाले भव्य भंडारों में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जुबान के स्वाद और चटकारे के लिए फुलकी के ठेलों पर महिलाओं की कतारें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं।
नवरात्र का स्वाद: आंकड़ों की नजर से
* दैनिक खपत: शहर में प्रतिदिन लगभग 2 से 3 लाख फुलकी गटक रहे हैं चटकारे के शौकीन।
* दैनिक कारोबार: चाट, फुलकी और इससे जुड़े छोटे व्यवसायियों का कुल दैनिक व्यापार लगभग 3 से 4 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
* पीक डेज की उम्मीद: अष्टमी और नवमी के दिन सड़कों पर भीड़ दोगुनी होने से यह व्यापार और भी रिकॉर्ड ऊंचाई छूने का अनुमान है।
छोटे कारोबारियों के चेहरे पर मुस्कान
पंचमी के बाद से ही शहर के मुख्य बाजारों और दर्शन मार्गों पर आधी रात तक मेले जैसा माहौल रहता है। चाट-फुलकी के व्यवसायियों का कहना है कि साल भर में नवरात्रि का समय उनके लिए सबसे बड़ा व्यापारिक अवसर लेकर आता है। छोटे-छोटे ठेलों से संचालित होने वाला यह असंगठित व्यापार नवरात्रि के नौ दिनों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को जबरदस्त बूस्ट दे रहा है।







