भोपाल में सीलिंग कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक

भोपाल में सीलिंग कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक
भोपाल, यश भारत । राजधानी में सीलिंग और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कार्रवाई के पालन में लापरवाही पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रहवासी क्षेत्रों में किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और जहां सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के निर्देश लागू हैं, वहां उनका सख्ती से पालन होना चाहिए।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पांच बिंदुओं में निर्देश जारी किए। अदालत ने कहा कि जिन क्षेत्रों का भूमि उपयोग स्पष्ट नहीं है अथवा जहां मिश्रित भूमि उपयोग की स्थिति है, उन्हें सीलिंग की कार्रवाई से अलग रखा जाए। हालांकि, स्पष्ट रूप से रहवासी उपयोग वाले क्षेत्रों में कार्रवाई नहीं रोकी जाए। सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अदालत के निर्देशों के अनुरूप जारी रखने को कहा गया।
सरकार की कमेटी पर उठे सवाल
मध्यप्रदेश सरकार की ओर से गठित कमेटी को लेकर अवमानना के मामले में अदालत के एमिकस क्यूरी ए.के. सिन्हा ने जांच की थी। सुनवाई में सिन्हा ने अदालत को बताया कि कमेटी गठित कर सरकार ने अदालत के आदेश की अवमानना की है।
इस पर मध्यप्रदेश सरकार की ओर से अधिवक्ता के.एन. नटराजन ने अदालत को बताया कि सरकार से इस संबंध में चर्चा हो चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आगे ऐसी कोई कमेटी गठित नहीं की जाएगी और सीलिंग की कार्रवाई को भी बाधित नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के आश्वासन को स्वीकार कर लिया। हालांकि, अवमानना के संबंध में अंतिम स्थिति लिखित आदेश सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
सुबह सीलिंग, शाम को खुल रहे प्रतिष्ठान
सुनवाई से पहले शुक्रवार सुबह भोपाल के करीब 10 रहवासियों की शिकायतें एमिकस क्यूरी के माध्यम से अदालत के सामने रखी गईं। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि कुछ स्थानों पर सुबह सीलिंग की कार्रवाई होती है, लेकिन शाम तक संबंधित प्रतिष्ठान फिर से खुल जाते हैं।
इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कई स्थानों पर निर्देशों का पूर्णतः पालन नहीं हो रहा है, विशेष रूप से भोपाल में। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जहां सीलिंग कार्रवाई के सख्त निर्देश हैं, वहां उनका पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए।
1995 के बाद नया मास्टर प्लान नहीं
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से भोपाल के मास्टर प्लान का मुद्दा भी रखा गया। अधिवक्ता के.एन. नटराजन ने बताया कि भोपाल के लिए 1995 के बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ है और पिछला मास्टर प्लान वर्ष 2005 में समाप्त हो चुका था। सरकार ने अदालत को बताया कि नए मास्टर प्लान का प्रारूप तैयार है और अब उसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को मास्टर प्लान के प्रारूप को जारी करने के संबंध में हरी झंडी दे दी।







