खास खबर : 100 साल पुरानी घंटाघर रामलीला पर ब्रेक, दशहरे के जलसे में सूना रहेगा इलाका, रामलीला मैदान में सार्वजनिक शौचालय बनाने के निर्णय से कमेटी है नाराज

कटनी, यशभारत। शहर वासियों के लिए यह खबर चौंकाने वाली है कि इस वर्ष घंटाघर में रामलीला का मंचन नहीं होगा। गोलबाजार रामलीला कमेटी ने जहां पृथ्वी पूजन के साथ रामलीला की तैयारियों का आगाज कर दिया है, वहीं घंटाघर में अब तक कोई हलचल नहीं है। यहां करीब 100 साल से भगवान श्री राम के जीवन चरित्र पर आधारित प्रसंगों का सुंदर मंचन होता आया है किंतु इस बार घंटाघर रामलीला से नियमित जुड़ाव रखने वाले लोगों को निराशा हाथ आ सकती है। घंटाघर में रामलीला का आयोजन न होने का असर कटनी के ऐतिहासिक दशहरा चल समारोह पर भी पड़ेगा।
यशभारत ने जब घंटाघर रामलीला कमेटी से जुड़े प्रमुख लोगों से बातचीत कर वजह जानने की कोशिश की तो पता चला रामलीला मैदान ने नगर निगम द्वारा बनाए गए सार्वजनिक शौचालय को लेकर नाराजगी है। कमेटी में ही हालांकि इस विषय को लेकर दो राय है। कुछ लोगों ने रामलीला के मंच से एकदम सटाकर सुलभ कॉम्प्लेक्स बनाने की सहमति दे दी, जबकि कमेटी के कुछ लोग यहां मूत्रालय के निर्माण को लेकर सहमत नहीं थे। घंटाघर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष आशीष गुप्ता ने तो नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज करा दिया था, इसके बावजूद नगर निगम ने सुलभ कॉम्प्लेक्स बनाने का निर्णय नहीं बदला। गोलबाजार रामलीला मैदान रघुनाथ गंज वार्ड का हिस्सा है। यह इलाका शहर का प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र कहलाता है, जहां बड़ी संख्या में दुकानदार भी हैं और खरीदी बिक्री करने हजारों की तादात में लोग इस इलाके में आते है लेकिन यहां अब तक कोई सार्वजनिक शौचालय न होने से लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
मूत्रालय की जगह बन गई दुकानें
जानकारी के अनुसार घंटाघर में पहले जायसवाल मार्केट में मूत्रालय के लिए स्थान छोड़ा गया था, लेकिन बाद में इस स्थान को भी दुकान का रूप दे दिया गया, जबकि मार्केट बनाने के नियमों में शौचालय की अनिवार्यता शामिल होती है। यही स्थित झंडाबाजार में भी बनी। यहां भी मार्केट बनाने के वक्त नगर निगम ने सार्वजनिक शौचालय के लिए जगह छोड़ी थी। लंबे समय तक वहां मूत्रालय नहीं बनाया गया। बाद में उस खाली स्थान पर भी दुकान आबाद हो गई। आलम यह है कि घंटाघर, सराफा और झंडाबाजार के इतने व्यापक क्षेत्र में कोई सार्वजनिक शौचालय न होने से नगर निगम को रामलीला मैदान की ओर रुख करना पड़ा।
दशहरा जुलूस में हनुमान जी निकलेंगे या नहीं ?
घंटाघर में रामलीला न होने से अब अगला सवाल यह भी सामने है कि विजयदशमी चल समारोह में क्या इस बार घंटाघर के हनुमान जी शामिल नहीं होंगे ? जब हनुमान जी नहीं होंगे तो रामदल भी नहीं होगा। बताया जा रहा है कि रामलीला कमेटी इस पर विचार कर रही है कि भले ही रामलीला का मंचन न हो पर दशहरा जुलूस में हनुमानजी की प्रतिमा शामिल की जाए। कुछ सदस्य यह भी कहते है कि यह भी मुश्किल ही होगा। बहरहाल एक शताब्दी के इतिहास में कोविड काल के दो सालों के अलावा यह पहला अवसर होगा जब दशहरे के जलसे में घंटाघर सूना होगा। यहां रामचरित मानस के दोहे नहीं गूंजेंगे।







