
नई दिल्ली, यश भारत। प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने के एक दिन बाद मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से संरक्षण कार्यक्रम के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने चार शावकों को जन्म दिया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी साझा की और इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने के अगले ही दिन चार नए शावकों का जन्म होना उम्मीद और चीता संरक्षण की दिशा में बढ़ती सफलता का प्रतीक है। उन्होंने कूनो नेशनल पार्क और प्रोजेक्ट से जुड़े सभी अधिकारियों, विशेषज्ञों और कर्मचारियों को बधाई दी।
प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी। इसी दिन नामीबिया से आठ अफ्रीकी चीतों को कूनो नेशनल पार्क लाया गया था। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत लाए गए और उन्हें कूनो में बसाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। KGP12 के चार शावकों का जन्म इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह भारत में जन्मी दूसरी पीढ़ी के चीतों के अस्तित्व को दर्शाता है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक वातावरण में सफल प्रजनन इस बात का महत्वपूर्ण संकेत है कि पुनर्वासित चीते भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल हो रहे हैं। प्रोजेक्ट चीता के चार वर्षों के दौरान कई चुनौतियां भी सामने आई हैं। बीमारी, चोट और अन्य पर्यावरणीय कारणों से कुछ वयस्क चीतों और शावकों की मौत हुई। इसके बावजूद कूनो में चीतों के सफल प्रजनन की घटनाओं ने कार्यक्रम की दीर्घकालिक संभावनाओं को मजबूत किया है। कूनो नेशनल पार्क अब भारत में चीता संरक्षण और पुनर्वास की प्रमुख प्रयोगशाला बन चुका है। यहां वन अधिकारियों, पशु चिकित्सकों और वन्यजीव विशेषज्ञों की निगरानी में चीतों के स्वास्थ्य और गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्येक नए जन्म से भारत में चीतों की प्रजनन आबादी को स्थिर करने और आनुवंशिक विविधता बनाए रखने की संभावना बढ़ती है।







