सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद तय होगी राजधानी के विकास की तस्वीर – सीलिंग से लेकर मास्टर प्लान तक उलझा भोपाल का कारोबार

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद तय होगी राजधानी के विकास की तस्वीर
– सीलिंग से लेकर मास्टर प्लान तक उलझा भोपाल का कारोबार
– आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल

भोपाल, यश भारत। राजधानी के आवासीय इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई, रहवासियों और व्यापारियों के विरोध तथा सरकार की ओर से नए मास्टर प्लान की तैयारी के बीच 15 सितंबर की सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, केवल मास्टर प्लान लागू होने से मौजूदा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को तत्काल राहत मिलना आसान नहीं होगा। इसके लिए भूमि उपयोग में बदलाव, भवनों का नियमितीकरण, शुल्क और जरूरी अधोसंरचना जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ सकता है।
2005 के बाद नहीं बना नया मास्टर प्लान
किसी भी शहर के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान जरूरी होता है। भोपाल में वर्ष 2005 के बाद नया मास्टर प्लान नहीं बना। ऐसे में शहर का विस्तार और विकास पुराने मास्टर प्लान के आधार पर ही होता रहा। इस दौरान आबादी बढ़ी, नई कॉलोनियां विकसित हुईं और आवासीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दुकानें, कार्यालय और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गईं। सडक़ की चौड़ाई, सीवेज, बिजली, पानी और पार्किंग जैसी सुविधाएं भी पहले से निर्धारित की जा सकती थीं। मास्टर प्लान के अभाव में कई आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ती चली गईं।
अरेरा कॉलोनी से शुरू हुई पहचान की प्रक्रिया
अरेरा कॉलोनी में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर मामला सामने आने के बाद नगर निगम ने शहर के अन्य हिस्सों में भी ऐसे प्रतिष्ठानों को चिन्हित किया। इसके बाद सीलिंग कार्रवाई शुरू हुई और मामला व्यापक विवाद में बदल गया। कार्रवाई के विरोध में व्यापारी कई बार सडक़ों पर उतरे। रोशनपुरा-न्यू मार्केट क्षेत्र में व्यापारियों ने करीब चार घंटे तक प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद और हाथापाई की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन के चलते पांच हजार से अधिक व्यापारियों द्वारा दुकानें बंद रखने का दावा किया गया। रोशनपुरा चौराहे पर भी यातायात प्रभावित हुआ।
कोलार से अवधपुरी तक विरोध
सीलिंग कार्रवाई के विरोध में कोलार व्यापारी महासंघ के आह्वान पर कोलार रोड का पूरा बाजार बंद रहा। यहां डी-मार्ट और शराब की दुकानें भी बंद रखी गईं। इसके अलावा अवधपुरी, रायसेन रोड और अन्य क्षेत्रों में भी व्यापारियों ने कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया।
मास्टर प्लान में राहत मिलेगी, लेकिन तुरंत नहीं
अर्बन एक्सपर्ट के अनुसार, सरकार यदि अरेरा कॉलोनी, बावडय़िाकलां, रोहित नगर जैसे बड़े क्षेत्रों को मिश्रित भूमि उपयोग के दायरे में शामिल करती है, तब भी मौजूदा प्रतिष्ठानों को तत्काल वैधता नहीं मिल जाएगी। इन क्षेत्रों में बढ़ी व्यावसायिक गतिविधियों के अनुरूप पार्किंग, सीवेज, बिजली, पानी और सडक़ जैसी सुविधाओं को विकसित करना होगा।
इसके साथ ही जिन भवनों को व्यावसायिक उपयोग के दायरे में लाया जाएगा, उनके भूमि उपयोग में बदलाव की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी देना पड़ सकता है। यह राशि सरकार तय करेगी। पूरी प्रक्रिया में करीब चार से छह महीने लगने की संभावना बताई जा रही है। 15 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट का रुख फिलहाल सबसे अहम है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सीलिंग कार्रवाई को लेकर तत्काल क्या दिशा बनती है और नए मास्टर प्लान के जरिए शहर के पुराने व्यावसायिक इलाकों को किस तरह व्यवस्थित किया जाएगा।
समय पर बने मास्टर प्लान, तभी सुलझेगी शहर की उलझी तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के शहरों के सुनियोजित और संतुलित विकास के लिए मास्टर प्लान बेहद जरूरी है। शहरों के विस्तार से लेकर आवासीय, व्यावसायिक और मिश्रित भू-उपयोग वाले क्षेत्रों के निर्धारण तक सभी व्यवस्थाएं स्पष्ट विकास योजना के आधार पर तय होनी चाहिए। भोपाल सहित जिन शहरों के नए मास्टर प्लान अब तक तैयार होकर सामने नहीं आए हैं, उनके मामलों को विभागीय स्तर पर गंभीरता से लेने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मास्टर प्लान में अनावश्यक देरी का सीधा असर शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं पर पड़ता है। सड़क की चौड़ाई, यातायात, पार्किंग, जल निकासी, सीवर, बिजली और पानी जैसी अधोसंरचनाओं की योजना पहले से तय होने पर ही शहर का विस्तार व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है। उन्होंने लंबित मास्टर प्लान की प्रक्रिया में तेजी लाने और संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अनावश्यक देरी होने पर संबंधित स्तर पर विभागीय कार्रवाई के भी संकेत दिए गए हैं।
व्यापारियों का पक्ष
व्यापारियों की मांग कार्रवाई रोकने के साथ ऐसी स्पष्ट नीति बनाने की है, जिससे वर्षों से कारोबार कर रहे प्रतिष्ठानों का भविष्य तय हो सके। शहर के विकास के साथ व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी व्यावहारिक व्यवस्था जरूरी है। मुख्यमंत्री ने जो निर्देश दिए हैं वह व्यापारियों के हित में हैं।
– गोविंद गोयल, अध्यक्ष, भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज
लंबे समय से संचालित प्रतिष्ठानों पर अचानक सीलिंग की कार्रवाई से कारोबार और उससे जुड़े परिवार प्रभावित हो रहे हैं। सरकार को पहले स्पष्ट नीति बनानी चाहिए और मास्टर प्लान के माध्यम से वैधानिक रास्ता उपलब्ध कराना चाहिए।
– आनंद सोनी, अध्यक्ष, 10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ संघर्ष समिति
कार्रवाई से पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वर्षों से चल रहे प्रतिष्ठानों का भविष्य क्या होगा। अचानक कार्रवाई के बजाय व्यवस्थित नीति बनाकर व्यापारियों को राहत दी जानी चाहिए।
– सुनील सिंह, अध्यक्ष, कोलार व्यापारी महासंघ







