भोपालमध्य प्रदेश

भोपाल में फर्जी पासपोर्ट रैकेट का पर्दाफाश: बांग्लादेशियों को भारतीय पहचान दिलाने वाला गिरोह सक्रिय, 70 से अधिक संदिग्ध पासपोर्ट मिले

भोपाल में फर्जी पासपोर्ट रैकेट का पर्दाफाश: बांग्लादेशियों को भारतीय पहचान दिलाने वाला गिरोह सक्रिय, 70 से अधिक संदिग्ध पासपोर्ट मिले

भोपाल, यशभारत। मध्य प्रदेश विशेष कार्य बल (STF) ने राज्य में सक्रिय एक बड़े फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट रैकेट का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बांग्लादेश से भारत आए अवैध नागरिकों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय नागरिक के रूप में पहचान दिलाता था। एसटीएफ को अब तक भोपाल और डबरा के पतों से जारी 70 से अधिक संदिग्ध पासपोर्ट की जानकारी मिली है।

जांच अधिकारियों के अनुसार, यह रैकेट गिरोह के जरिए बांग्लादेश से आए लोगों के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, पैन कार्ड और आधार कार्ड तैयार करवाता था। इन फर्जी पहचान पत्रों का उपयोग करके भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन किया जाता था। इस मामले में भोपाल के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र स्थित अन्ना नगर के एक मठ के पते से लगभग 40 पासपोर्ट जारी होने का खुलासा हुआ है। इससे पहले ग्वालियर के डबरा स्थित सिमरिया टेकरी की बौद्ध विहार कॉलोनी के एक ही पते से करीब 30 लोगों के नाम पर पासपोर्ट जारी होने की बात सामने आई थी। ये सभी पासपोर्ट वर्ष 2021, 2022 और 2023 के दौरान बनाए गए थे।

एसटीएफ की पूछताछ में यह भी सामने आया है कि फर्जी पासपोर्ट हासिल करने वाले कुछ लोग खुद को बौद्ध अनुयायी बताकर विदेश यात्राएं करते थे। जांच में इनके थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान जाने की पुष्टि हुई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि इन यात्राओं का मकसद केवल फर्जी पहचान का इस्तेमाल था या इसके पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क काम कर रहा है।

मामले में एसटीएफ ने मुख्य मास्टरमाइंड रियाल चौधरी समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। एसपी एसटीएफ राहुल लोढ़ा ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। गिरोह की जड़ों तक पहुंचने के लिए एसटीएफ की एक पांच सदस्यीय टीम असम भेजी गई है।

दूसरी ओर, एक ही मठ और विहार के पते से दर्जनों पासपोर्ट जारी होने से स्थानीय पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एसटीएफ अब यह जांच भी कर रही है कि सत्यापन के दौरान इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे नहीं पकड़ी गई और इसमें शामिल अधिकारियों या कर्मचारियों की क्या भूमिका रही है।

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