
राशन के आंकड़ों में बड़ा झोल
विभाग की सूचना ने ही खोल दी पोल
कुल हितग्राही 1,99,939 बताए, लेकिन पूर्ण और लंबित के आंकड़े जोड़ने पर निकल रहे सिर्फ 19,939; केवाईसी नहीं तो अगले माह राशन बंद करने की बात
कटनी, यशभारत। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में राशन पाने वाले हितग्राहियों की पुनः केवाईसी को लेकर खाद्य विभाग की जारी सूचना ने ही एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विभाग ने जिले में कुल 1 लाख 99 हजार 939 हितग्राहियों की पुनः केवाईसी किए जाने की जानकारी दी है। इसी सूचना में 10 हजार 858 हितग्राहियों की केवाईसी पूरी और 9 हजार 81 हितग्राहियों की केवाईसी बाकी बताई गई है। लेकिन इन दोनों आंकड़ों को जोड़ने पर संख्या महज 19 हजार 939 होती है। यानी कुल संख्या और पूर्ण-लंबित मामलों के आंकड़ों में 1 लाख 80 हजार का सीधा अंतर सामने आ रहा है।
अब सवाल सिर्फ आंकड़े गलत लिखे जाने का नहीं, बल्कि यह है कि जिले में वास्तव में कितने राशन हितग्राहियों की पुनः केवाईसी होनी है? यदि कुल संख्या 1,99,939 सही है तो पूर्ण और लंबित मामलों के आंकड़े कहां गए? और यदि 10,858 पूर्ण तथा 9,081 लंबित आंकड़े सही हैं तो कुल संख्या 1,99,939 कैसे पहुंच गई? सरकारी योजना से जुड़ी सूचना में इतनी बड़ी गणना संबंधी विसंगति सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुनः केवाईसी नहीं कराने पर आगामी माह से राशन बंद होने की संभावना है। यानी जिस आंकड़े के आधार पर हितग्राहियों को अपनी केवाईसी कराने की सूचना दी जा रही है, वही आंकड़ा स्पष्ट नहीं है। ऐसे में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है।
दूसरी ओर, वृद्ध, अशक्त और बीमार हितग्राहियों के लिए विभाग ने नॉमिनी के माध्यम से राशन लेने की सुविधा बताई है। जिन लोगों का अंगूठा नहीं लगता या बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण में परेशानी आती है, वे राशन दुकान, नगर परिषद या संबंधित खाद्य अधिकारी को आवेदन देकर परिवार के सदस्य को नॉमिनी बना सकते हैं। नॉमिनी का आधार और बायोमेट्रिक विवरण पीओएस मशीन में दर्ज होने के बाद उसके अंगूठे से राशन दिया जा सकेगा।
यदि परिवार में 16 से 65 वर्ष की आयु का कोई अन्य वयस्क सदस्य नहीं है तो नियमानुसार वृद्ध हितग्राही को ही नॉमिनी बनाए जाने की व्यवस्था भी बताई गई है।
अब असली जवाबदेही विभाग की है। जनसंपर्क के माध्यम से जारी सूचना में यदि आंकड़े इसी रूप में दिए गए हैं तो जिला प्रशासन और खाद्य विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि 1,99,939, 10,858 और 9,081 में से सही आंकड़ा कौन सा है। राशन जैसी संवेदनशील योजना में आंकड़ों का यह अंतर महज टाइपिंग की गलती है या डाटा संकलन में कोई बड़ी चूक—इसकी स्थिति सार्वजनिक रूप से साफ होनी चाहिए।
क्योंकि गलत आंकड़े सिर्फ कागज पर नहीं रहते, उनका असर सीधे उस परिवार की थाली पर पड़ सकता है जिसे अगले महीने राशन मिलना है।







