मध्य प्रदेशराज्य

बेदखली को लेकर ग्रामीणों का प्रदर्शन : वन विभाग की कार्रवाई से बढी नाराजगी

सतना यश भारत । परसमनिया पठार के महाराजपुर बीट में वनभूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब विरोध का रूप लेने लगी है। वन विभाग की कार्रवाई से नाराज आदिवासी ग्रामीण लामबंद होकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा उनकी खड़ी फसलों को नष्ट कर दिया गया और बिना उचित सूचना के बेदखली की कार्रवाई की गई।

 

ग्रामीणों का कहना है कि महाराजपुर क्षेत्र में कई परिवार पीढ़ियों से जंगल और वनभूमि पर निर्भर हैं। खेती और वनोपज ही उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। ग्रामीणों के मुताबिक उन्होंने कोदो-कुटकी, मक्का, अरहर, उड़द और मूंग जैसी फसलें कर्ज लेकर बोई थीं, लेकिन कार्रवाई के दौरान फसलों को नुकसान पहुंचा, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

 

वनाधिकार दावों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग

 

ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष सबसे प्रमुख मुद्दा वनाधिकार कानून-2006 के तहत किए गए दावों का उठाया। उनका कहना है कि वनभूमि पर अधिकार के लिए उनके द्वारा दावे प्रस्तुत किए गए हैं, लेकिन अभी तक उन्हें दावों की वर्तमान स्थिति और निराकरण की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। ग्रामीणों ने मांग की कि जब तक वनाधिकार दावों का विधिवत निराकरण नहीं हो जाता, तब तक बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।

 

महाराजपुर पंचायत के ललित सिंह गोंड के नेतृत्व में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्रवाई की जांच कराने की भी मांग की। उनका आरोप है कि कार्रवाई से पहले उन्हें पर्याप्त सूचना नहीं दी गई। ग्रामीणों ने नुकसान का आकलन कर उचित राहत दिलाने की मांग प्रशासन से की है।

वन विभाग ने कार्रवाई को बताया नियमानुसार

 

इधर, वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार महाराजपुर बीट में करीब 4 से 5 हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण किया गया था। विभाग का कहना है कि अतिक्रमण लगातार वन क्षेत्र में बढ़ाया जा रहा था, जिसके चलते नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। विभाग के मुताबिक अतिक्रमण हटाई गई भूमि पर सागौन के पौधे भी लगाए गए हैं।

 

अब इस मामले में ग्रामीणों की शिकायत और वन विभाग के पक्ष के बीच प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ग्रामीण वनाधिकार दावों के निराकरण और कार्रवाई पर रोक की मांग कर रहे हैं, जबकि वन विभाग इसे अतिक्रमण हटाने की नियमानुसार कार्रवाई बता रहा है।

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