लापरवाही उजागर : कृषि उपज मंडी में सड़ गई करोड़ों की धान, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम एवं मंडी प्रशासन की बेपरवाही, कलेक्टर तक पहुंचा मामला, शिकायतों की हो रही जांच

कटनी, यशभारत। कृषि उपज मंडी में शेड क्रमांक दो में कुछ साल पहले रखवाई गई करोड़ों रूपए की धान देखरेख के अभाव में खराब होने का मामला सामने आया है। इस पूरे मामले में मध्यप्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड और कृषि उपज मंडी के अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। जानकारी के मुताबिक यह धान तत्कालीन कलेक्टर अवि प्रसाद के कार्यकाल के उन्हीं के निर्देश पर मंडी के शेड क्रमांक दो में रखवाई गई थी, लेकिन इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने न तो धान की नीलामी की और न ही रखरखाव के लिए कोई प्रयास किए। जिसके चलते धान खराब होकर सड़ गई। बताया जाता है कि धान के सडऩे के बाद अब पूरे क्षेत्र में बदबू फैल रही है, जिससे संक्रामक बीमारियों के पनपने की आशंका है। इस मामले में कलेक्टर आशीष तिवारी से कार्रवाई की मांग की गई है। इसको लेकर एक शिकायत भी दी गई है, जिसकी जांच शुरू हो गई है। इस मामले को लेकर जब संबंधित अधिकारियों से उनका पक्ष जानना चाहा तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।
विदित हो कि राज्य सरकार के निर्देश प्रतिवर्ष दिसम्बर-जनवरी के महीने में मध्यप्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड द्वारा समितियों के माध्यम से किसानों से समर्थन मूल्य पर धान का उपार्जन िकया जाता है। इसके लिए जिले में करीब 80 से ज्यादा केन्द्र बनाए जाते हैं, जहां करीब 40 हजार से अधिक किसानों से उनकी उपज खरीदते हुए बैंक खातों में भुगतान किया जाता है। साल 2025-26 में करीब 4 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया था। धान के उपार्जन के बाद सरकारी और गैर-सरकारी वेयर हाऊस में धान का भंडारण किया जाता है। इसके बाद शासन के निर्देश मिलते ही धान की मिलिंग होती है। इस सबके बीच मंडी में रखी धान के खराब होने का मामला सामने आया है।
शेड क्रमांक दो में रखी धान
बताया जाता है कि कृषि उपज मंडी कटनी के शेड क्रमांक दो में मध्यप्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड के अधिकारियों द्वारा लगभग 2 से 3 वर्ष पूर्व करोड़ों रुपये मूल्य की धान रखवाई गई थी। लंबे समय तक उचित रखरखाव एवं नीलामी नहीं होने के कारण धान के खराब होने की स्थिति निर्मित हो गई है, जिससे शासन को भारी आर्थिक क्षति होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। कृषि उपज मंडी के अधिकारियों से जब इसकी जानकाारी ली गई तो पता चला कि उक्त धान तत्कालीन कलेक्टर अवि प्रसाद के कार्यकाल में नान विभाग द्वारा मंडी परिसर में रखवाई गई थी लेकिन आज तक उसकी नीलामी अथवा उचित निस्तारण नहीं किया गया है। अब इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की जा रही है।







