कांप गई रूह! : फाइलों में पल रहीं गायें, जमीन पर निगल रही मौत : गौशाला का कड़वा सच….गौशाला या मौत का इंतजार! तीन महीने से राशि नहीं, 15 गौवंश की मौत; गड्ढे में मिले शव…

डिंडौरी। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर कारोपानी ग्राम पंचायत स्थित गौशाला में गौसंरक्षण व्यवस्था की गंभीर तस्वीर सामने आई है। बेसहारा गौवंश को संरक्षण देने के उद्देश्य से संचालित इस गौशाला में अव्यवस्थाओं के चलते गौवंशों की लगातार मौत होने का दावा किया जा रहा है। गौशाला परिसर के पास गड्ढे में कई मृत गौवंश के शव पड़े मिले, जिन्हें आवारा कुत्ते नोचते नजर आए। वहीं गौशाला के भीतर कई गायें कुपोषित और बीमार अवस्था में मिलीं। एक बछड़ा मूर्छित हालत में जमीन पर पड़ा मिला, जिससे व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई गौवंशों के शरीर, आंख और नाक पर गहरे घाव हैं, लेकिन उपचार की समुचित व्यवस्था नहीं दिखी। चारे और पानी की कमी के कारण अधिकांश पशु कमजोर नजर आए।
तीन महीने से नहीं मिली संचालन राशि, गहने गिरवी रखकर खरीदा चारा

गौशाला का संचालन कर रही मां अंबे आजीविका स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि पिछले तीन महीने से शासन की ओर से संचालन मद की राशि उनके खाते में नहीं आई है। आर्थिक संकट के चलते समूह की महिलाओं ने अपने गहने तक गिरवी रखकर गौवंशों के लिए चारा-भूसे की व्यवस्था की, ताकि पशु भूखे न रहें।

समूह की सचिव का कहना है कि बीते एक महीने में करीब 15 गौवंशों की मौत हो चुकी है। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
103 की क्षमता, 130 से 150 गौवंश रखे गए
जानकारी के अनुसार गौशाला की स्वीकृत क्षमता 103 गौवंश की है, जबकि वर्तमान में यहां 130 से 150 गौवंश रखे गए हैं। क्षमता से अधिक पशुओं के कारण चारा, पानी, उपचार और रखरखाव की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि अतिरिक्त गौवंशों को यहां भेजने के बाद उनकी व्यवस्था सुनिश्चित क्यों नहीं की गई।
निरीक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल
लगातार हो रही मौतों और बदहाल व्यवस्थाओं के बीच जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। यदि समय-समय पर निरीक्षण और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती, तो संभवतः इतनी बड़ी संख्या में गौवंशों की मौत टाली जा सकती थी।
तत्काल सुधार और जवाबदेही की मांग
गौवंश भारतीय समाज में आस्था और संवेदना का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में गौशाला में भूख, बीमारी और अव्यवस्थाओं के बीच दम तोड़ते गौवंश गंभीर चिंता का विषय हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की जवाबदेही तय करने, लंबित संचालन राशि तत्काल जारी करने तथा गौशाला में चारा, पानी, उपचार और अन्य मूलभूत व्यवस्थाएं तत्काल बहाल करने की मांग की है।






