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30 घंटे अंधेरे में डूबे इलाके, कांग्रेस का आरोप,पार्षदों के वार्ड चिन्हित कर बिजली काटी 

कांग्रेस ने बिजली विभाग के दफ्तर में ताला लगाने की दी चेतावनी

 जबलपुर, यश भारत। बिजली विभाग की कार्रवाई को लेकर शहर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नगर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ नाटी शर्मा ने बिजली विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग ने अपनी मनमानी और गुंडागर्दी की सारी हदें पार कर दी हैं। आरोप है कि बकाया बिल की वसूली के नाम पर शहर के कई ट्रांसफार्मरों की बिजली सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी गई, जिसके कारण हजारों उपभोक्ता प्रभावित हुए

 कई इलाकों में करीब 30 घंटे तक बिजली बाधित रही

नगर कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप है कि सोमवार सुबह करीब 9 बजे से शुरू हुई बिजली कटौती मंगलवार दोपहर तक जारी रही। इस दौरान कई इलाकों में लोगों को रात भर अंधेरे में रहना पड़ा। बिजली सप्लाई बंद होने से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ बच्चों, बुजुर्गों और रोजमर्रा के कामकाज करने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।  शर्मा ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग ने जानबूझकर उन वार्डों के ट्रांसफार्मरों को चिन्हित किया, जहां कांग्रेस के पार्षद हैं। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से यह तर्क दिया गया कि संबंधित क्षेत्रों में बिजली बिलों का एरियर 60 से 80 प्रतिशत तक है, इसलिए ट्रांसफार्मर से सप्लाई बंद की गई।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी क्षेत्र में कुछ उपभोक्ताओं पर बिजली बिल बकाया है तो पूरे इलाके की बिजली बंद कर देना किस नियम के तहत सही है? जिन 20 से 40 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने समय पर और ईमानदारी से बिजली बिल जमा किया है, उनकी गलती क्या है? आखिर उन्हें 30 घंटे तक अंधेरे में रखने की जिम्मेदारी कौन लेगा?

ईमानदार उपभोक्ताओं को क्यों मिली सजा?

नगर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बिजली विभाग स्वयं स्वीकार कर रहा है कि कई इलाकों में 60, 70 और 80 प्रतिशत तक बिजली बिल का बकाया था। ऐसे में सवाल यह है कि जिन उपभोक्ताओं ने समय पर बिल जमा किया, उन्हें भी बिजली से वंचित क्यों रखा गया? उन्होंने कहा कि बिना पूर्व सूचना बिजली सप्लाई बाधित किए जाने की स्थिति में उपभोक्ताओं को मुआवजा मिलने का प्रावधान है। इसी मांग को लेकर बड़ी संख्या में उपभोक्ता बिजली विभाग के कार्यालय पहुंचे और 30 घंटे तक बिजली बाधित रहने का मुआवजा मांगा। सौरभ नाटी शर्मा ने कहा कि विद्युत विभाग के इतिहास में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि बिजली बाधित रहने पर किसी उपभोक्ता को वास्तविक रूप से मुआवजा दिया गया हो। विभाग उपभोक्ताओं के अधिकारों की बात तो करता है, लेकिन जब जवाबदेही तय करने की बात आती है तो उपभोक्ताओं की आवाज दबाने का काम किया जाता है।

15 से ज्यादा वार्डों को लेकर पक्षपात का आरोप

नगर कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि ऐसे लगभग 15 वार्ड प्रभावित हुए, जहां कांग्रेस के पार्षद हैं। उन्होंने दावा किया कि सत्येंद्र चौबे, संतोष पांडे, प्रमोद पटेल और गुलाम हुसैन सहित अन्य कांग्रेस पार्षदों के वार्डों को चिन्हित कर वहां बिजली सप्लाई बाधित की गई।
कांग्रेस ने इसे सामान्य वसूली कार्रवाई नहीं बल्कि राजनीतिक पक्षपात बताते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नगर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी उपभोक्ता का बिल बकाया होने पर उसके खिलाफ नियमानुसार व्यक्तिगत कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन पूरे क्षेत्र के ट्रांसफार्मर बंद कर हजारों लोगों को परेशान करना उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है।

अधीक्षक अभियंता को चेतावनी, दफ्तर में ताला लगाने की धमकी

सौरभ नाटी शर्मा ने बताया कि उन्होंने अधीक्षक अभियंता संजय अरोरा  से इस मामले में स्पष्ट बातचीत की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में कांग्रेस पार्षदों के वार्डों को चिन्हित कर इसी तरह पक्षपातपूर्ण तरीके से बिजली सप्लाई बंद की गई तो कांग्रेस पार्टी बिजली विभाग के कार्यालय में ताला लगाने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी केवल बयानबाजी नहीं करेगी, बल्कि बिजली उपभोक्ताओं को साथ लेकर बड़ा आंदोलन करेगी। जरूरत पड़ी तो बिजली विभाग के कार्यालयों का घेराव किया जाएगा और विभाग की व्यवस्था के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन होगा।
नगर कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर बिजली बिल की वसूली के लिए पूरे ट्रांसफार्मर की सप्लाई बंद करने का अधिकार विभाग को किस नियम और किस धारा के तहत मिला

पुलिस से एफआईआर दर्ज करने की मांग

सौरभ नाटी शर्मा ने बिजली विभाग की कार्रवाई को गंभीर बताते हुए पुलिस प्रशासन से भी मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। उनका आरोप है कि सोमवार से मंगलवार तक जिस तरह से बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की बिजली सप्लाई बाधित की गई, उसकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।  उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि किन अधिकारियों के आदेश पर ट्रांसफार्मरों की सप्लाई बंद की गई, कितने उपभोक्ता प्रभावित हुए और क्या बिजली विभाग ने कार्रवाई से पहले नियमानुसार सूचना दी थी या नहीं। फिलहाल बिजली विभाग की इस कार्रवाई को लेकर प्रभावित इलाकों में नाराजगी बनी हुई है। उपभोक्ता अब 30 घंटे तक बिजली बाधित रहने का मुआवजा मांग रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि यदि भविष्य में इस तरह की कार्रवाई दोहराई गई तो जबलपुर में बिजली विभाग के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

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