बड़ी फिल्मों के बीच छोटी फिल्म का बड़ा धमाका, दर्शकों की पसंद ने बदली बॉक्स ऑफिस की तस्वीर
50 साल पहले ‘जय संतोषी मां’ ने दिखाई थी राह

मुंबई , यशभारत। । सिनेमाघरों में इन दिनों बड़ी स्टारकास्ट वाली फिल्मों के बीच कम बजट की फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर चौंकाने वाला प्रदर्शन किया है। सनी देओल, यश और इमरान हाशमी जैसे बड़े सितारों की फिल्मों के मुकाबले सीमित बजट और बिना बड़े प्रचार के रिलीज हुई इस फिल्म ने दर्शकों के बीच अपनी जगह बना ली है। फिल्म की कहानी नीम करोली बाबा से जुड़ी बताई जा रही है। करीब दो करोड़ रुपए के बजट में बनी इस फिल्म को रिलीज के शुरुआती दिनों में दर्शकों का खास रिस्पॉन्स नहीं मिला। पहले दो सप्ताह में इसकी कमाई बेहद सीमित रही और एक समय ऐसा भी आया, जब इसे सिनेमाघरों से हटाने की तैयारी होने लगी। हालांकि तीसरे सप्ताह के बाद फिल्म को दर्शकों से मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया ने पूरी तस्वीर बदल दी।
ट्रेड एक्सपर्ट तरण आदर्श के मुताबिक फिल्म की सफलता में ‘वर्ड ऑफ माउथ’ यानी दर्शकों की आपसी चर्चा और सकारात्मक प्रतिक्रियाओं की बड़ी भूमिका रही। दर्शकों ने फिल्म पसंद की तो इसकी चर्चा सोशल मीडिया और व्यक्तिगत स्तर पर तेजी से फैलने लगी। नतीजा यह रहा कि चौथे सप्ताह में फिल्म के शो और दर्शक दोनों बढ़ते चले गए।
बड़ी फिल्मों के बीच बढ़ती गई मांग
रिपोर्ट के अनुसार रिलीज के समय ‘हनुमान अंश’ को सीमित स्क्रीन मिली थीं। बाद में बड़ी फिल्मों के आने से इसके शो और कम कर दिए गए। लेकिन जब सिनेमाघरों में दर्शकों की मांग बढ़ी तो कई जगह फिल्म को दोबारा स्क्रीन मिलने लगीं। टिकट बुकिंग में बढ़ती मांग ने भी वितरकों और थिएटर संचालकों का ध्यान खींचा। फिल्म की करीब 42 करोड़ रुपए की कमाई ने ट्रेड में चर्चा पैदा कर दी है। यानी बेहद छोटे बजट के मुकाबले फिल्म ने कई गुना कारोबार किया। यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि फिल्म के कलाकार और निर्देशक बड़े स्टार नाम नहीं हैं और इसके प्रचार पर भी बड़े बजट की फिल्मों की तरह भारी रकम खर्च नहीं की गई।
50 साल पहले ‘जय संतोषी मां’ ने दिखाई थी राह
छोटी फिल्म की बड़ी सफलता का उदाहरण हिंदी सिनेमा में नया नहीं है। वर्ष 1975 में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र अभिनीत ‘शोले’ जैसी बड़ी फिल्म के साथ कम बजट की धार्मिक फिल्म ‘जय संतोषी मां’ रिलीज हुई थी। बड़े सितारों के अभाव के बावजूद फिल्म ने दर्शकों के बीच ऐसी लोकप्रियता हासिल की कि वह अपने दौर की बड़ी सफल फिल्मों में शामिल हो गई। हनुमान अंश’ की सफलता भी यही संकेत देती है कि बॉक्स ऑफिस पर केवल बड़ा बजट, स्टारकास्ट और प्रचार ही सफलता की गारंटी नहीं हैं। यदि कहानी और विषय दर्शकों से जुड़ जाएं तथा सकारात्मक चर्चा बन जाए, तो सीमित संसाधनों वाली फिल्म भी बड़ी फिल्मों को चुनौती दे सकती है।







