डिजिटल इंडिया का ‘टिन-शेड’ मॉडल:700 से अधिक स्कूल भवन जर्जर, शिक्षा व्यवस्था के जर्जर हालातो को बयां करती विशेष रिपोर्ट…

मंडला । जिले में सरकारी स्कूलों के जर्जर भवन बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहे हैं। जिले के करीब 1950 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय भवनों में से 700 से अधिक को मरम्मत या नए निर्माण की जरूरत है। घुघरी विकासखंड के ग्राम सुरेहली की सोढाटोला प्राथमिक शाला इसका उदाहरण है, जहां पिछले दो वर्षों से 39 बच्चे टीन शेड के नीचे पढ़ाई कर रहे हैं। सोढाटोला प्राथमिक शाला का भवन वर्ष 2007-08 में बनाया गया था। समय के साथ भवन की छत का प्लास्टर और अन्य हिस्से टूटकर गिरने लगे। दुर्घटना की आशंका को देखते हुए शिक्षा विभाग ने भवन में कक्षाओं के संचालन पर रोक लगा दी। भवन बंद होने के बाद स्कूल के लिए गांव से करीब एक किलोमीटर दूर दूसरा भवन चिन्हित किया गया। लेकिन छोटे बच्चों के लिए वहां तक पहुंचना मुश्किल होने के कारण विद्यालय का संचालन गांव में ही टीन शेड के नीचे शुरू कर दिया गया।
बारिश में भीगकर पढ़ने को मजबूर छात्र
बरसात के दौरान टीन शेड में पानी भर जाता है। तेज हवा और बारिश के समय बच्चों को भीगते हुए पढ़ाई करनी पड़ती है। इससे पढ़ाई प्रभावित होने के साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। विद्यालय के शिक्षक बस्सूलाल उइके ने बताया कि नए भवन के निर्माण का प्रस्ताव विभाग को भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली है। इसी वजह से फिलहाल अस्थायी व्यवस्था में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
जिला परियोजना समन्वयक अशोक शुक्ला ने बताया कि पिछले वर्ष विद्यालय की मरम्मत के लिए 81 हजार रुपये स्वीकृत किए गए थे। पहली किश्त के रूप में करीब 40 हजार रुपये शाला प्रबंधन समिति को जारी भी किए गए, लेकिन ग्रामीणों ने मरम्मत के बजाय नए भवन के निर्माण की मांग करते हुए कार्य का विरोध किया।






