25 बच्चों की मौत के बाद दवा निगरानी पर फोकस 2047 तक एफडीए को आधुनिक बनाने की तैयारी, लैब, उपकरण और जिला कार्यालयों के विस्तार की योजना

25 बच्चों की मौत के बाद दवा निगरानी पर फोकस
2047 तक एफडीए को आधुनिक बनाने की तैयारी, लैब, उपकरण और जिला कार्यालयों के विस्तार की योजना
भोपाल, यश भारत। छिंदवाड़ा बैतूल और पांढुर्णा में जहरीले कफ सिरप से 25 मासूमों की मौत के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन एफडीए के ढांचे को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। वर्ष 2047 के विजन के तहत तैयार किए जा रहे मास्टर प्लान में पहले चरण में करीब 100 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी है। योजना का उद्देश्य दवा परीक्षण क्षमता बढ़ाना प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण और निगरानी तंत्र को अधिक प्रभावी बनाना है। प्रदेश में फिलहाल दवा जांच की क्षमता सीमित होने से सालभर में लगभग छह हजार नमूनों की ही जांच हो पाती है। रिपोर्ट आने में कई बार चार महीने तक का समय लग जाता है। भोपाल इंदौर और जबलपुर की प्रयोगशालाओं में संसाधनों और तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण जांच की गति प्रभावित है जबकि ग्वालियर में प्रस्तावित लैब का निर्माण भी अधूरा है। करीब 70 हजार मेडिकल स्टोरों की निगरानी केवल 79 औषधि निरीक्षक कर रहे हैं जिससे नियमित निरीक्षण और सैंपलिंग चुनौती बनी हुई है। नई योजना के तहत भोपाल की लैब में माइक्रोबायोलॉजी परीक्षण सुविधा शुरू की जाएगी आधुनिक एचपीएलसी मशीनें लगेंगी और प्रत्येक जिले में सर्वसुविधायुक्त एफडीए कार्यालय स्थापित किए जाएंगे। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि मास्टर प्लान से दवा गुणवत्ता की निगरानी मजबूत होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिलेगी।







