मीनाक्षी नटराजन का केंद्र पर तीखा हमला बोलीं सवालों का जवाब देने के बजाय मुद्दों से ध्यान भटका रही सरकार
जबलपुर,यशभारत।

जबलपुर,यशभारत। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन ने केंद्र सरकार पर छात्रों, किसानों और युवाओं से जुड़े अहम मुद्दों पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक सवालों का उत्तर देने के बजाय नए राजनीतिक विवाद खड़े कर मूल मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। राज्यसभा नामांकन से जुड़े घटनाक्रम के बीच मीडिया से चर्चा में उन्होंने NEET पेपर लीक, छात्र आंदोलन, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) और लोकतांत्रिक अधिकारों सहित कई विषयों पर कांग्रेस का पक्ष रखा। मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि NEET पेपर लीक केवल परीक्षा में अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विश्वास का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि परीक्षा घोटालों के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और इस विषय को राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उनका कहना था कि छात्रों की समस्याओं पर गंभीर चर्चा करने के बजाय सरकार दूसरे मुद्दों को सामने लाकर बहस की दिशा बदलने का प्रयास कर रही है।प्रदर्शनों के दौरान लगे विवादित नारों के संबंध में उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी आंदोलन में असामाजिक या अराजक तत्व शामिल हुए हैं तो उनकी पहचान कर उचित कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन कुछ घटनाओं के आधार पर पूरे आंदोलन और उसमें शामिल छात्रों की मंशा पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि किसान आंदोलन सहित कई बड़े जन आंदोलनों में भी अंतिम चरण में विवादित घटनाओं को प्रमुखता देकर मूल मुद्दों को पीछे धकेलने की कोशिश की गई। उनके अनुसार, यह सरकार की एक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के मुद्दे पर मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि संविधान केवल समानता ही नहीं, बल्कि समता (Equity) की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि विवाह, उत्तराधिकार, संपत्ति और गोद लेने जैसे संवेदनशील विषयों पर सभी समुदायों और संबंधित पक्षों से व्यापक संवाद के बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि यदि वयस्कों के विवाह या लिव-इन संबंधों के पंजीकरण में अभिभावकों की सहमति जैसी शर्तें लागू की जाती हैं तो इससे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विशेष रूप से महिलाओं के निर्णय लेने के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।







