
जबलपुर। देश की सर्वोच्च अदालत में जल्द ही पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट में रिक्त पदों को भरने के लिए पांच नामों की सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी है। इस सूची में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा का नाम प्रमुख रूप से शामिल है।
कॉलेजियम द्वारा भेजी गई अनुशंसा को न्यायपालिका में बड़ा कदम माना जा रहा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी आने की संभावना है। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण संवैधानिक और जनहित से जुड़े मामले लंबित हैं, जिनके जल्द निपटारे की उम्मीद जताई जा रही है।
इन पांच नामों की हुई सिफारिश

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जिन पांच नामों को मंजूरी देकर केंद्र सरकार को भेजा है, उनमें—
● जस्टिस शील नागू
मुख्य न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
● जस्टिस संजीव सचदेवा
मुख्य न्यायाधीश, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
● वी. मोहाना
सीनियर एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट (बार से सीधे पदोन्नति)
● जस्टिस श्री चंद्रशेखर
● जस्टिस अरुण पाली
शील नागू और संजीव सचदेवा के नाम पर खास चर्चा
जस्टिस शील नागू का न्यायिक अनुभव काफी लंबा माना जाता है। उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों में कई अहम फैसले दिए हैं। हाल ही में उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था। वहीं, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा भी न्यायिक क्षेत्र में अपनी सख्त और संतुलित कार्यशैली के लिए पहचाने जाते हैं।
दोनों वरिष्ठ न्यायाधीशों के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने को मध्य प्रदेश सहित देश की न्यायिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वी. मोहाना की नियुक्ति भी खास
इस सूची में वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहाना का नाम भी विशेष महत्व रखता है। उन्हें सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश बनाए जाने की सिफारिश की गई है। यदि उनकी नियुक्ति को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो वे सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाली चुनिंदा महिला अधिवक्ताओं में शामिल होंगी। इसे न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।
अब केंद्र सरकार और राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी
कॉलेजियम की सिफारिश अब केंद्र सरकार को भेज दी गई है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचना जारी की जाएगी, जिसके बाद इन नियुक्तियों पर अंतिम मुहर लग जाएगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में नए जजों की नियुक्ति से न्यायिक कार्यों में तेजी आएगी और लंबित मामलों के बोझ को कम करने में मदद मिलेगी।







