पेट्रोल और डीजल के दामों में इजाफा, कम्पनियों को रहे नुकसान की भरपाई करने सरकार ने लिया फैसला

नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल महंगा हो गया है। पेट्रोल 3.14 रुपए और डीजल 3.11 रुपए प्रति लीटर महंगा हो गया है। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है. पेट्रोल 3.14 रुपए और डीजल 3.11 रुपए महंगा हो गया है। अब राजधानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 97.91 रुपए और एक लीटर डीजल की कीमत 90.78 रुपए हो गई है। ईरान-अमेरिका युद्ध और वैश्विक उथल-पुथल के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी उछाल आ गया था। जिसकी वजह से भारत की सरकारी कंपनियों को हर दिन एक हजार करोड़ यानी महीने में 30 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा था। कुछ समय पहले तक जो कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह अब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है।
बता दें कि पिछले लगभग 4 सालों से स्थिर चल रही कीमतों में आज बड़ा बदलाव आ गया है. दिल्ली में नियमित पेट्रोल 94.77 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर अब 97.77 रुपए हो गया है, वहीं, डीजल की कीमत 87.67 रुपए से बढ़कर 90.67 रुपए प्रति लीटर हो गई है। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण ईंधन आपूर्ति में किल्लत बनी हुई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है.
28 फरवरी को शुरू हुए ईरान-अमेरिका युद्ध के बावजूद सरकार ने लंबे वक्त तक पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में वृद्धि नहीं की थी, लेकिन कंपनियों को हो रहे नुकसान को देखते हुए सरकार ने आखिरकार दाम बढ़ाने का फैसला किया।
पीएम मोदी ने की थी पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील
इससे पहले पीएम मोदी ने बीते रविवार को संकट के मद्देनजर विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद और विदेश यात्रा को स्थगित करने जैसे उपायों की अपील की थी। रुपये में भारी गिरावट आई है और वर्तमान में यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के नीचे पहुंच गया है।
भोपाल में पेट्रोल का रेट 106.68 रुपये से बढ़कर 109.82 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डीजल 91.87 रुपये से बढ़कर 94.98 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक परिस्थितियों के कारण तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ा है, जिसके चलते यह फैसला लिया गया।
भोपाल में पेट्रोल का रेट 106.68 रुपये से बढ़कर 109.82 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डीजल 91.87 रुपये से बढ़कर 94.98 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक परिस्थितियों के कारण तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ा है, जिसके चलते यह फैसला लिया गया।







