शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर डीपीआई कार्यालय के बाहर प्रदर्शन डीपीआई पहुंचे अभ्यर्थियों ने मुंडन करवाया और नतमस्तक होकर किया प्रदर्शन

शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर डीपीआई कार्यालय के बाहर प्रदर्शन
डीपीआई पहुंचे अभ्यर्थियों ने मुंडन करवाया और नतमस्तक होकर किया प्रदर्शन
भोपाल यश भारत । राजधानी भोपाल में माध्यमिक शिक्षक वर्ग 2 और प्राथमिक शिक्षक वर्ग 3 भर्ती के अभ्यर्थियों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर देखने को मिला। पदों की संख्या बढ़ाने और जल्द नियुक्ति देने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने डीपीआई कार्यालय के बाहर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कई अभ्यर्थियों ने मुंडन कराकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई, वहीं महिला और पुरुष अभ्यर्थियों ने दंडवत होकर विभाग और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में हजारों पद खाली होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में नाममात्र की सीटें घोषित की गई हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से नियुक्ति नहीं मिलने के कारण कई परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहे हैं। आंदोलन के दौरान एक भावुक मामला भी सामने आया। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने बताया कि एक शिक्षक का बेटा ब्लड कैंसर से पीड़ित है और आर्थिक तंगी के कारण उसके इलाज में कठिनाई आ रही है। ऐसे में साथी शिक्षक आपस में सहयोग कर बच्चे का इलाज कराने में मदद कर रहे हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों की भारी कमी है। विधानसभा के बजट सत्र में प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि विभाग में कुल 2 लाख 89 हजार 5 स्वीकृत पद हैं जबकि केवल 1 लाख 74 हजार 419 शिक्षक कार्यरत हैं। यानी करीब 1.15 लाख से अधिक पद रिक्त पड़े हुए हैं। इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया में बेहद कम पद जारी किए गए, जिससे बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थी चयन से बाहर हो गए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि शिक्षक भर्ती वर्ग 2 में प्रत्येक विषय में कम से कम 3 हजार पद बढ़ाए जाएं या संपूर्ण भर्ती में न्यूनतम 10 हजार पदों की तत्काल वृद्धि कर दूसरी काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की जाए। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि वे लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं लेकिन सरकार और विभाग उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रहे। उनका कहना था कि करीब तीन घंटे तक धरना, दंडवत प्रदर्शन और नारेबाजी के बावजूद कोई भी अधिकारी बातचीत या आश्वासन देने तक नहीं पहुंचा जिससे अभ्यर्थियों में नाराजगी और बढ़ गई।







