मध्य प्रदेशराज्य

दूषित पानी से हड़कंप: “स्कॉडा सिस्टम” फेल, त्रासदी की आशंका

सतना यश भारत । शहर में करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार किए गए हाईप्रोफाइल स्कॉडा सिस्टम की हकीकत अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ती नजर आ रही है।

 

नगर निगम के वार्ड क्रमांक 1 के अमौधा और बगहा क्षेत्र समेत वार्ड 3 के गढ़िया टोला में पिछले एक महीने से नलों से झागयुक्त, बदबूदार और हरे रंग का दूषित पानी सप्लाई होने से रहवासियों में दहशत फैल गई है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है और अब इलाके में संक्रमण फैलने का खतरा गहराने लगा है।

 

स्थानीय नागरिकों ने सीएम हेल्पलाइन, नगर निगम और जल विभाग में लगातार शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन हर बार सिर्फ “जल्द सुधार” का भरोसा देकर मामले को टाल दिया गया। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग अब पानी उबालकर पीने को मजबूर हैं, जबकि कई परिवार बाहर से पेयजल खरीद रहे हैं।

 

क्षेत्रवासियों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते पाइपलाइन और सीवर लाइन की जांच नहीं कराई गई तो सतना में भी इंदौर जैसी भयावह स्थिति बन सकती है। लोगों ने दिसंबर 2025 की उस दर्दनाक घटना का जिक्र किया, जब इंदौर के कुछ इलाकों में सीवर मिश्रित पानी की सप्लाई से गंभीर संक्रमण फैल गया था। उस दौरान बीमारियों के फैलाव और अव्यवस्था ने प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए थे। सतना के नागरिकों का कहना है कि यहां भी हालात तेजी से उसी दिशा में बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।

स्थानीय पार्षद अभिषेक तिवारी ने नगर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि निगम के अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह निरंकुश हो चुके हैं। जनता की शिकायतों को तो नजरअंदाज किया ही जा रहा है, अब जनप्रतिनिधियों की बातों को भी महत्व नहीं दिया जा रहा।

 

पार्षद के अनुसार कई बार दूषित पानी की तस्वीरें और वीडियो अधिकारियों को भेजे गए, लेकिन किसी ने मौके पर जाकर स्थायी समाधान निकालने की कोशिश नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कॉडा सिस्टम सिर्फ कागजों और प्रस्तुतियों तक सीमित रह गया है, जबकि जमीनी स्तर पर जल आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।

 

 पानी को “सुरक्षित” बताने पर भड़के लोग

गढ़िया टोला में हालात उस समय और बिगड़ गए जब शिकायत के बाद जांच के लिए पहुंची विशेष टीम ने हरे रंग के पानी का सैंपल लेकर उसे “पीने योग्य” बता दिया। टीम की इस रिपोर्ट पर स्थानीय लोग भड़क उठे और जांच अधिकारियों से तीखी बहस हो गई। रहवासियों का कहना था कि जिस पानी से बदबू आ रही है और जिसमें झाग निकल रहे हैं, उसे सुरक्षित बताना जनता की जिंदगी से खिलवाड़ है।

 

पुराने पाइप, जर्जर लाइनें और सीवर मिक्सिंग की आशंका

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई इलाकों में दशकों पुरानी पाइपलाइनें अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। जगह-जगह लीकेज होने से सीवर का गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते व्यापक जांच और पाइपलाइन रिप्लेसमेंट नहीं किया गया तो हैजा, टायफाइड और पीलिया जैसी जलजनित बीमारियां फैल सकती हैं।

 

सतना में बढ़ता जल संकट अब सिर्फ नगर निगम की लापरवाही का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। यदि प्रशासन ने तत्काल उच्चस्तरीय जांच, पाइपलाइन ऑडिट और दूषित जल आपूर्ति बंद करने जैसे कदम नहीं उठाए तो आने वाले दिनों में स्थिति भयावह हो सकती है।

 

शहरवासियों ने मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजकर मेडिकल कैंप लगाए जाएं और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

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