मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला: मंत्रियों के स्वेच्छानुदान में होगी बढ़ोतरी, 16वें वित्त आयोग की योजनाओं को मिली निरंतरता

मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला: मंत्रियों के स्वेच्छानुदान में होगी बढ़ोतरी, 16वें वित्त आयोग की योजनाओं को मिली निरंतरता
भोपाल, यशभारत। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार को मंत्रालय में कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में प्रदेश के विकास और जनहित से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। बैठक का मुख्य केंद्र राज्य मंत्रियों के स्वेच्छानुदान की राशि में वृद्धि और आगामी 5 वर्षों के लिए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को विस्तार देना रहा।
मंत्रियों के बढ़े अधिकार, अब विकास कार्यों में आएगी तेजी
कैबिनेट ने राज्य मंत्रियों को दी जाने वाली स्वेच्छानुदान की राशि को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव पर विचार किया। इसके साथ ही चर्चा है कि कैबिनेट मंत्रियों के विवेकाधीन कोष में भी आनुपातिक बढ़ोतरी को मंजूरी मिल सकती है। इस निर्णय से मंत्रियों को अपने क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आकस्मिक जरूरतों के लिए सहायता राशि जारी करने में अधिक सुविधा होगी।
बुधनी को मिलेगी मेडिकल कॉलेज की सौगात
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में सरकार ने बुधनी में नवीन चिकित्सा महाविद्यालय, अस्पताल और नर्सिंग कॉलेज की स्थापना के लिए पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। इससे न केवल क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होंगी, बल्कि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर भी पैदा होंगे।
16वें वित्त आयोग तक जारी रहेंगी लोक कल्याणकारी योजनाएं
सरकार ने दूरदर्शिता दिखाते हुए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 (16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि) तक महत्वपूर्ण योजनाओं को जारी रखने का निर्णय लिया है। इसके तहत लोक निर्माण विभाग शहरी और नगरीय मार्गों के सुदृढ़ीकरण और उन्नयन का कार्य जारी रखेगा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना को निरंतरता दी गई है, जिससे लाखों बुजुर्गों को आर्थिक सुरक्षा मिलती रहेगी। जल संसाधन विभाग की ‘खुमानसिंह शिवाजी जलाशय (ठिकरिया तालाब) सूक्ष्म सिंचाई परियोजना’ को प्रशासनिक हरी झंडी मिल गई है।
अन्य प्रमुख फैसले:
जबलपुर हाईकोर्ट: उच्च न्यायालय परिसर में मल्टीलेवल पार्किंग और बार ऑफिस निर्माण परियोजना को सूचकांक गणना से मुक्त रखा जाएगा, जिससे निर्माण कार्य में तेजी आएगी।
प्रशासनिक कसावट: विभागीय अधिकारियों के खिलाफ चल रही जांचों और सेवानिवृत्त अधिकारियों की संविदा नियुक्ति को लेकर भी अहम चर्चा हुई।
कैबिनेट के इन निर्णयों से यह स्पष्ट है कि मोहन सरकार आगामी वर्षों के लिए एक मजबूत प्रशासनिक और बुनियादी ढांचा तैयार करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।







