_कैसी कही…. फितरती_ मंत्री को खुश करने की कोशिश, भीड़ ने बिगाड़ा खेल

_कैसी कही…. फितरती_
मंत्री को खुश करने की कोशिश, भीड़ ने बिगाड़ा खेल
मंत्रियों के सामने नंबर बढ़ाने की होड़ में अफसर कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते। हाल ही में हुए एक सरकारी आयोजन में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। कार्यक्रम में कुछ व्यवस्थाएं गड़बड़ा गईं तो एक अफसर ने तुरंत कमान संभाल ली। लेकिन मंत्री जी जो आमतौर पर बड़ी भीड़ के बीच कार्यक्रमों के आदी हैं कम लोगों की मौजूदगी देखकर खासे नाराज हो गए।
अफसर ने कार्यक्रम को बार-बार संभालने की कोशिश की लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। मंत्री जी नाराजगी जाहिर कर कार्यक्रम से विदा हो गए। मंत्री के जाते ही अफसर फिर से सरकारी योजनाओं का बखान करने में जुट गए। उधर कुछ अफसरों का कहना था कि उस दिन मंत्री जी का मूड पहले से ही कुछ ज्यादा गर्म था। अब देखना यह होगा कि इस नाराजगी की गूंज आगे किस अफसर के तबादले में सुनाई देती है।
फाइलें घूम रहीं, साइन से डर रहे अफसर
मंत्रालय के अंदरखाने इन दिनों एक अलग ही नज़ारा देखने को मिल रहा है। एक विभाग में वरिष्ठ अफसरों के बीच तालमेल का ऐसा अकाल पड़ा है कि बाबू भी काम से दूरी बनाए हुए हैं। कभी फाइलें बाबुओं की मेज पर अटक जाती हैं तो कभी अफसर ही साइन करने से बचते नजर आते हैं। नतीजा यह कि जो काम कुछ ही समय में पूरे हो सकते थे वे अब सरकारी गलियारों में चक्कर काट रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि बाबुओं की तनातनी इतनी बढ़ चुकी है कि विभाग के बाहर भी इसकी चर्चा होने लगी है। कोई काम करने से बच रहा है तो कोई काम करके भी क्रेडिट से दूर है।
यानी फाइलें चल रही हैं लेकिन मंज़िल तक पहुंचने में उन्हें काफी वक्त लग रहा है।
राजधानी से मोहभंग नहीं, कुर्सी से प्रेम बरकरार
राजधानी की हवा कुछ अफसरों को इतनी रास आ जाती है कि तीन साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी उनका मन यहां से हटने का नाम नहीं लेता। ऐसे ही एक अफसर इन दिनों राजधानी में ही कहीं सेटिंग तलाशने में जुटे हैं। वजह साफ है वर्तमान विभाग के मंत्री से तालमेल कुछ खास जम नहीं पाया। नतीजा यह कि दूसरे मंत्रियों के दरबार में भी उनकी एंट्री कुछ खास नहीं हो सकी।
सूत्र बताते हैं कि अफसर ने राजधानी में टिके रहने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। फोन कॉल से लेकर मुलाकातों तक सब कुछ आजमा लिया गया लेकिन फिलहाल उनकी गुहार सुनने वाला कोई नजर नहीं आ रहा।
तबादला सूची पर ब्रेक, अफसरों को मिला एक्सटेंशन
वित्तीय वर्ष की समाप्ति ने इस बार कई आईएएस अफसरों को अनचाही पैकिंग से बचा लिया है। तबादला सूची पर फिलहाल ब्रेक लग गया है और अब अप्रैल के आखिर तक ही इसके आने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि राहत की सांस लेने वाले अफसरों को अंदरखाने यह भी पता चल चुका है कि सरकार की नजर उन्हें कहाँ भेजने पर टिकी है। यही वजह है कि कई अफसर अभी से मनचाही मंज़िल की टिकट कटाने में जुट गए हैं। कहीं पुराने संपर्क खंगाले जा रहे हैं तो कहीं नई दोस्ती की पटकथा लिखी जा रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस तबादला-खेल में किसकी जुगाड़ मजबूत साबित होती है और किसे सरकारी आदेश के साथ अपना सामान बांधना पड़ता है।







