कौवों के झुंड ने शिकारी गिद्ध को घेरा – पास बैठा दूसरा गिद्ध नहीं आया बचाने – हलाली डैम के पास दिखा रोमांचक नजारा

कौवों के झुंड ने शिकारी गिद्ध को घेरा
– पास बैठा दूसरा गिद्ध नहीं आया बचाने
– हलाली डैम के पास दिखा रोमांचक नजारा

भोपाल, यशभारत। जंगल और खुले आसमान में पक्षियों की दुनिया भी कई बार किसी रोमांचक कहानी से कम नहीं होती। ऐसा ही एक दिलचस्प और रोमांचक दृश्य हलाली डैम के पास देखने को मिला। एक अकेला लाल सिर वाला गिद्ध अचानक कौवों के झुंड से घिर गया। कौवे लगातार उस गिद्ध को घेरकर शोर मचाते रहे और कई बार उसके पास आकर उस पर चोंच से हमला करते नजर आए। कौवों के बचने के लिए गिद्ध ने कई बार प्रयास किया। पास में ही एक यूरेशियन ग्रिफिन गिद्ध पूरे घटनाक्रम को शांत भाव से किनारे बैठकर देखता रहा, मानो वह इस ड्रामा का मूक दर्शक हो। इस पूरे नजारे को एक फोटोग्राफर ने अपने कैमरे में कैद किया है। जिसे वनविहार प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर साझा किया है।
वन्यजीव फोटोग्राफी के दौरान कैद हुए इस दृश्य में साफ देखा जा सकता है कि कौवों का झुंड बार-बार उडक़र गिद्ध के पास जाता है, उसके आसपास मंडराता है और तेज आवाज में कांव-कांव करते हुए उसे परेशान करता है। सामान्य तौर पर गिद्ध आकार में बड़े और ताकतवर होते हैं, इसलिए छोटे पक्षी उनसे दूरी बनाकर रखते हैं। लेकिन कई बार कौवे समूह में मिलकर बड़े पक्षियों को भी घेर लेते हैं।
पक्षियों का यह व्यवहार मॉबिंग कहलाता है
पक्षियों के जानकारों के अनुसार इसे पक्षी व्यवहार में मॉबिंग कहा जाता है, जिसमें छोटे पक्षी मिलकर किसी बड़े पक्षी या शिकारी को अपने क्षेत्र से दूर भगाने की कोशिश करते हैं। संभव है कि यह घटना भी उसी व्यवहार का हिस्सा हो। कई बार कौवे अपने घोंसलों या भोजन के क्षेत्र के आसपास किसी बड़े पक्षी को देख लेते हैं, तो वे झुंड बनाकर उसे परेशान करते हुए हमला करने लगते हैं ताकि वह उस इलाके से दूर चला जाए। गिद्ध को भी कौवों का झुंड शोर मचाते हुए हटाने की कोशिश कर रहे हैं।
पास बैठा गिद्ध नहीं आया मदद के लिए आगे
इस पूरे घटनाक्रम में एक और दिलचस्प पहलू यह रहा कि पास बैठा यूरेशियन ग्रिफिन गिद्ध पूरे समय शांत रहा और मानो दूर से यह सब देखता रहा। उसने न तो कौवों को भगाने की कोशिश की और न ही इस झुंड में शामिल हुआ। वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह दृश्य काफी खास माना जा रहा है, क्योंकि ऐसे प्राकृतिक व्यवहार बहुत कम मौके पर इतने स्पष्ट रूप से देखने को मिलते हैं।







