एनएचएम के बायोमेडिकल इंजीनियर और उपसंचालक के बीच विवाद गहराया

एनएचएम के बायोमेडिकल इंजीनियर और उपसंचालक के बीच विवाद गहराया
भोपाल स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में हड़कंप, हेल्थ कमिश्नर ने बैठाई जांच कमेटी
भोपाल, यशभारत। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्य प्रदेश के अंतर्गत कार्यरत एक संभागीय बायोमेडिकल इंजीनियर और अस्पताल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी के बीच का विवाद अब तूल पकड़ चुका है। संभागीय बायोमेडिकल इंजीनियर शुभम उपाध्याय ने स्वास्थ्य विभाग के उपसंचालक डॉ. योगेश सिंह कौरव पर मारपीट और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, डॉ. कौरव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कर्मचारी की कार्यशैली और मानसिक स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं। मामला अब लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा आयुक्त तक पहुंच गया है, जिन्होंने इसकी जांच के लिए एक विशेष कमेटी गठित कर दी है।
शुभम का आरोप: सार्वजनिक रूप से मारा थप्पड़
शुभम उपाध्याय ने आयुक्त को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि भोपाल में ओरिएंटेशन ट्रेनिंग के दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने दावा किया कि डॉ. योगेश सिंह कौरव ने अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी में उन्हें थप्पड़ मारा और उन पर लगातार देर रात तक काम करने का दबाव बनाया जाता है। शुभम के अनुसार, इस प्रताड़ना से तंग आकर जनवरी 2024 में उन्होंने कफ सिरप का अत्यधिक सेवन कर आत्महत्या का प्रयास भी किया था। शुभम ने मांग की है कि उन्हें उनके मूल पदस्थापना स्थल उज्जैन संभाग वापस भेज दिया जाए, क्योंकि वे वर्तमान माहौल में काम करने में असमर्थ हैं।
अधिकारी का पलटवार: ‘काम में लापरवाही और मानसिक अस्थिरता
दूसरी ओर, उपसंचालक डॉ. योगेश सिंह कौरव ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि शुभम का अकादमिक रिकॉर्ड तो अच्छा है, लेकिन प्रैक्टिकल फील्ड में वे बेहद कमजोर हैं। उन्होंने दावा किया कि शुभम घंटों फोन पर बात करते हैं और बिना अनुमति के कार्यालय से गायब रहते हैं। डॉ. कौरव ने आत्महत्या के प्रयास की बात पर कहा कि कफ सिरप का मामला बीमारी के दौरान ओवरडोज का था, जिसे अब गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि शुभम को क्लिनिकल हेल्प की जरूरत है और उनके परिवार ने भी संकट के समय उनका साथ नहीं दिया।







